> दोसत की मा, भुवा और बहन की चुदाइ - Dost Ki Ma Bua Aur Bahan Ki Chudai

दोसत की मा, भुवा और बहन की चुदाइ - Dost Ki Ma Bua Aur Bahan Ki Chudai

Posted on Thursday, 4 October 2012 | No Comments


दोसत की मा, भुवा और बहन की चुदाइ

पयरे रेअदेरस (चूत वलियोन और लुनद वलोन) मैन दिनु सबसे पहले मैन सभि चूत वलियोन और लुनद वलोन को दनयवद देता हुन कयुन कि मेरि कहनिया, लोगो को कफि पसनद अयी और मुज़े ए-मैल के जरिये मले/फ़ेमले का कफ़ि रेसपोनसे मिला, लोगो ने मुज़े और सतया कथा लिखने का होसला दिया। इसलिये फिर से आप लोगो के पस्स एक सचि कहनि पेस कर रहा हुन, आशा हैन पिछलि कहनिओन कि तरह येह कहनि भि आप लोगो को पसनद आयेगि।

येह कहनि मेरे दोसत कित मा, भुवा और बहन को चोदने वलि है। ये बात आज से 9-10 बरश पहले कि हैन जब मेरि उमर 20-21 साल कि थि। ऊन दिनो मैन बोमबय मेन रहता था। मेरे मकन के बगल मेन एक नया किरयेदर सुखबिनेर रहने आया। वो किरये के मकन मेन अकेला रहता था। मेरि हुम उमर का था इसलिये हुम दोनो मेन गहरि दोसति होगयी। वो मुज़ पर अधिक विसवस रखता था कयोनकि मेन सरकरि करमचरि था और उस से जयदा पदा लिखा था। वो एक परिवते फ़सतोरी मे मचिने ओपेरतोर था। उसके परिवर मेन केवल 4 सदसया थे। उसकि विधवा मा 41 साल कि, विधवा भुवा (यनि कि उसकि मा कि सग्गि ननद) 35 साल कि और उसकि कुवनरि बहन 18-19 साल कि थि। वे सब उसके गावँ मैन रहकर अपनि खेति बदि करते थे।

दिवलि वसतिओन मेन उसकि मा और बहन मुमबै मेन 1 महिने के लिये आये हुये थे। देसेमबेर मेन उसकि मा और बहन वपस गावँ जने कि जिध करने लगे। लेकिन कम अतयधिक होने के करन सुखबिनदेर को 2 महिने तक कोइ भि छुति नहि मिल सकति थि। इसलिये वो तेनतिओन मे रहने लगा। वो चहता था कि किसि का गावँ तक सथ हो तो वो मा और बहन को उसके साथ भेज सकता है। लेकिन किसि का भि साथ नहि मिला।

सुखबिनदेर को तेनतिओन मेन देख कर मैने पुछा, कया बात सुखबिनेर, आज कल तुम जयदा तेनतिओन मेन रहते हो "

सुखबिनदेर: कया करुन यार, काम जयदा होने के करन मेरा ओफ़्फ़िसे मुज़े अगले 2 महिने तक छुति नहिन दे रहि हैन और इधर मा गावँ जने कि जिध कर रहि हैन। मैन चहता हुन कि अगर कोइ गावँ तक किसि का साथ रहे तो मा और बहन अछि तरह से गावँ पहुनच जयेगि और मुज़े भि चिनता नहिन रहेगि लेकिन गावँ तक का कोइ भि साथ नहिन मिल रहा हैन ना हि मुज़े छुति मिल रहि हैन इसलिये मैन कफ़ि तेनतिओन मेन हुन।

दिनु: यार अगर तुमे इतरज़ ना हो तो मैन तुमहरि परोबलेम हल करसका हुन और मेरा भि फयदा होजयेगा।

सुखबिनदेर : यार मैन तुमहरा येह ऐसहन जिनदगि भर नहिन भुलुनगा आगर तुम मेरि परोबलेम हल कर दो तो। लेकिन यार कैसे तुम मेरि परोबलेम हल करोगे और कैसे तुमहरा फयदा होगो "

दिनु: यार सरकरि दफ़तर के अनुसर, मुज़े साल मेन 1 महिने कि छुति मिलति हैन। अगर मैन चुत्ति लेता हुन तो मुज़े गावँ या कहिन भि जने का आने जने का किरया भि मिलता है और एक महिने कि पगर भि मिलति। अगर मैन चुति ना लू तो 1 महिने कि छुति लपेस हो जति है और कुछ नहिन मिलता हैन।

सुखबिनदेर: यार तुम छुति लेकर मा और बहन को गावँ पहुनचा दो इस बहने तुम मेरा गावँ भि घुम आना।

अगले दिन हे मैने छुति कि लिये आवेदन पत्रा देदिया और मेरि छुति मनजूर होगयी।

सुखबिनदेर ने चलु तिसकेत लेकर हुम दोनो को रैलवय सततिओन पहुनचने आया। हुमने त्त को रेकुएसत कर के किसि तरह 2 सेअत अर्रनगे करलि। गदि करिब रात 8:40 पर रवना हुयी। रात करिब 10 बजे हुमने खना खया और गपशुप करने लगे। बहन ने कहा भया मुज़े नीनद आरहि हैन और वो उपर के बिरथ पर सो गयी। कुछ देर बद मा भि निचे के बिरथ पर चद्दर औध कर सो गयी और कहा कि तुम अगर सोना चहते हो तो मेरे पैर के पस्स सिर रख कर सो जना। मुज़े भि थोदि देर बद नीद अने लगि और मैन उनके पैर के पस्स सिर रख कर सो गया। सोने से पहले मैन पनत खोल कर शोरत पहन लिया। मा अपने बयी तरफ़ करवत कर के सो गयीए। कुछ देर बद मुज़े भि नीनद आने लगि और मैन भि उनका चद्दर ओध कर सोगया। अचनक रात करिब 1:30 मेरि नीनद खुली मैने देखा कि मा कि सरि कमर के उपर थि और उनकि चुत घने झनतो के भिच छुपि थि। उनका हथ मेरे शोरत पर लुनद के करिब था। येह सब देख कर मेरा लुनद शोरत के अनदेर फदफदने लगा। मैन कुछ भि समज नहिन परहा थत कि कया करून। मैन उथकर पैसब करने चला गया। जब वपस आया मैन चद्दर उथा कर देखा तो अभि तक मा उसि अवसथा मैन सोयी थि। मैन भि उनकि तरफ़ करवत कर के सोगया लेकिन मुज़े नीनद नहिन आ रहि थि।

बर बर मेरि अनखोन के समने उनकि चुत घूम रहि थि। थोदि देर बद एक सततिओन आया वहन 5 मिनुतेस तक त्रैन रुकि थि और मैन विचर कर रहा था कि कया करून। जैसे हे गदि चलि मेरे भगया ने साथ दिया और हमरे दिब्बे कि लिघत चली गयि मैने सोचा कि भगवन भि मेरा सथ दे रहा हैन। मैने अपना लुनद शोरत से निकल कर लुनद के सुपदे कि तोपि निचे सरका कर सुपदे पर धेर सरा थुक लगा कर सुपदे को चुत के मुख के पस रख कर सोने का नतक करने लगा। गदि के धक्के के करन आधा सुपदा उनकि चुत मैन चला गया लेकिन मा कि तरफ़ से कोइ भि हरकत ना हुयी। या तो वो गहरि नीनद मैन थि या वो जनभुज़ कर कोइ हरकत नहि कर रहि थि मैन समज नहिन पया। गदि के धक्के से केवल सुपदे का थोदा सा हिस्सा चुत मेन अनदर बहर हो रहा था। एक ब्बर तो मेरा दिल हुवा कि एक धक्का लगा कर पुरा का पुरा लुनद चूत मेन दल दुन लेकिन सनकोच ओर दर के करन मेरि हिमत नहिन हुयी। गदि के धक्के से केवल सुपदे का थोदा सा हिस्सा चुत मेन अनदर बहर हो रहा था। इस तरह चोदते चोदते मेरे लुनद ने धेर सरा फ़ुवरा उनकि चूत और झनतो के उपर फ़ेक दिया। अब मैन अपना लुनद शोरत मैन दल कर सो गया। करिब सवेरे 7 बजे मा ने उथया और कहा कि चै पीलो और तयर हो जओ कयुनकि 1 घनते मेन हुमरा सततिओन अन्ने वला है। मैन फि फ़रेश हो कर तयर होगया। सततिओन आने तक मा बहन और मैन इदर उदर कि बतेन करने लगे। करिब 09:30 बजे हुम सुखबिनदेर के घर पहुनचे। वहन पर सुखबिनदेर कि भुवा ने हुमरा सवगत किया और कहा नो धो कर नसता करलो। हुम नहा धो कर आनगन मैन बैथ कर नसता करने लगे। करिब 11:00 बजे भुवा ने मा से कहा "भभि जि आप लोग थक गये होनगे, आप अरम किजिये मैन खेत मैन जरहि हुन और मैन शम को लोतुनगि। मा ने कहा थिक हैन और मुज़से बोलि अगर तुम आरम करना चहो तो आरम करलो नहिन तो भुवा के साथ जा कर खेत देख लेना। मैने कहा कि मैन आरम नहिन करुनगा कयुकि मेरि नीद पुरि होगयी हैन, मैन भुवजि के साथ खेत चला जता हुन वहन पर मेरा तिमे पस्स भि हो जयेगा।

मैन और भुवा खेत कि और निकल पदे। रसते मेन हुम लोगो ने इदर उदर कि कफ़ि बतेन कि। उनका खेत बहुत बदा था खेत कि एक कोने मे एक छोता सा मकन भि था। दोपहर होने के करन आजु बजु के खेत मेन कोयी भि नथा। खेत पहुनच कर भुवजि कम मैन लग गयी और कहा कि तुमे अगर गरमि लग रहि हो तो शिरत निकल लो उस मकन मेन लुनगि भि हैन चहे तो लुनगि पहन लो और यहन आकर मेरि मदद थोदि मदद करदो। मैन मकन मेन जकर शिरत उतर दिया और लुनघि बनियन पहनकर भुवा जि के कम मेन मदद करने लगा। कम करते करते कभि कभि मेरा हाथ भुवजि कि चुतर पर तौच होता था। कुछ देर बद बुवजि से मैने पुछा, भुवजि यहन कहिन पेसब करने कि जगहा हैन " भुवजि बोलि कि मकन के पिछे जदियोन मेन जकर करलो। मैन जब पिसब कर के वपस आया तो देखा भुवजि अब भि कम कर रहि थि। तोदि देर बाद भुवजि बोलि "आओ अब खना खते हैन और थोदि देर आरम कर के फ़िर कम मेन लग जते हैन" अब हुम खेत के कोने वले मकन मेन आकर खना खने कि तयरि करने लगे। मैन और भुवा दोनो ने पहले हाथ पैर धोये फिर खना खने बैथ गये। भुवजि मेरे समने हि बैथ कर खना खा रहि थि। खना खते समय मैने देखा कि मेरे लुनगि जरा सिदे मेन हत गयी थि जिस करन मेरे उनदेरवेअर से आधा निकला हुवा लुनद दिखयी दे रहा था। और भुवजि कि नज़र बबर मेरे लुनद पर जा रहि थि। लेकिन उनहोने कुछ नहि कहा और बिच बिच मे उसकि नज़र मेरे लुनद पर हि जा रहि थि। खना खने के बाद भुवजि बरतन धोने लगि जब वो झुकर बरतन धो रहि थि तो मुज़े उनके बदे बदे बूबस साफ़ नज़र आ रहे थे। उनहोने केवल बलौसे पहना हुवा था। बरतन धोने के बाद वो कमरे मैन आकर चतै बिछा दि और बोलि "चलो थोदि देर आरम करते हैन" मैन चतै पर आकर लेत गया। भुवा बोलि "बेते आज तो बदि गरमि हैन" कहा कर वो अपनि सरि खोल दि और केवल पेत्तिसोअत और बलौसे पहन कर मेरे बगल मेन आकर उस तरफ़ करवत कर के लेत गयी।

आचना मेरि नज़र उनके पेत्तिसोअत पर गयी। उनकि दहिनि और कि कमर पर जहन पेत्तिसोअसत का नदा बनधा था वहा पेर कफ़ि गपे था और गपे से मैने उनकि कुच कुच झनते दिखयी दे रहि थि। अब मेरा लुनद लुनघि के अनदर हरकत करने लगा। थोदि देर बद भुवजि ने करवत बदलि तो मैने तुरनत आनखे बनद करके सोने का नतक करने लगा। थोदि देर बद भुवजि उथि और मकन के पिछे चल पदि। मैन उतसहा के करन मकन कि खिदकि पर गयी। खिदकि बनद थि लेकिन उसमे एक सुरख था मैन सुरख पर आनख लगकर देखा तो मकन का पिछला भग साफ़ दिखयी दे रहा था। भुवा वहन बैथ कर पेसब करने लगि बेसब करने के बद भुवजि थोदि देर अपनि चुत सहलति रहि फिर उथकर मका के अनदर आने लगि। फ़िर मैन तुरनत हि अपनि सथन पर आकर लेत गया। भुवजि जब वपन मकन मेन आयी तो मैन भि उथकर पिछलि तरफ़ पेसब करने चला गया। मैन जनभुज़ कर खिदकि कि तरफ़ लुनद पकर कर पेसब करने लगा मैने महसूस किया कि खिदकि थोदि खुली हुयी थि और भुवजि कि नज़र मेरे लुनद पर थि। पेसब करके जब वपन आया तो देखा भुवजि चित लेति हुयी थि। मेरे अने के बाद भुवा बोलि बेते आज मेरे कमर बहुत दुख रहि हैन। कया तुम मेरि कमर कि मलिश कर सकते हो " मैने कहा कयोन नहि। उसने कहा थिक हैन समे तेल का शिशि पदि हैन उसे लका मेरि कमर कि मलिश कर देना। और फिर वो पेत के बल लेत गयी। मैन तेल लगा कर उनकि कमर कि मलिश करने लगा। वो बोलि बेते थोदा निचे मलिश करो। मैने कहा भुवजि थोदा पेत्तिसोअत का नदा धिला करोगि तो मलिश करने मेन आसनि होगि और पेत्तिसोअत पर तेल भि नहिन लगेगा। भुवजि ने पेत्तिसोअत का नदा धिला कर दिया अब मैन उनकि कमर पर मलिश करने लगा। उनहोने और थोदा निचे मलिश करने को कहा। मैन थोदा निचे कि तरफ़ मलिश करने लगा। थोदि देर मलिश करने के बद वो बोलि बस बेते और नदा बनद कर लेत गयी। मैन भि बगल मेन आकर लेत गया। अब मेरे दिलोन और दिमग ने कैसे चोदा जये यह विचर करने लगा। अधे घनते के बद भुवजि उथि और सरि पहन कर अपने कम मेन लग गयी।

शम को करिब 6 बजे हुम घर पहुनचे। घर पहुनचकर मैने कहा मा मेन बजर जरहा हुन। 1 घनते बद आजौनगा येह कहकर मैन बज़र कि और निकल पदा रसते मेन मैने सरब कि दुकन से बीर कि बोत्तलेस ले आया। घर अकर हाथ पैर धो कर केवल लुनगि पहन कर दुसरे कमरे मेन जकर बीर पिने लगा। एक घनते मेन मैने 4 बोत्तले बीर पी लि थि और बीर का नसुमन हवि होने लगा। इतने मे भुवजि ने खने के लिये अवज़ लगयी। हुम सब साथ बैथ कर खना खने लगे। खना खने के बद मैन सिगरते कि दुकन जकर सिगरते पिने लगा जब वपस आया तो आनगन मे सब बैथ कर बतेन कर रहे थे। मैन भि उनकि बतोन मे समिल होगया और हनसि मज़ग करने लगा। बतोन बतोन मेन भुवजि मा से बोलि "भभि दिनु बेता अछि मलिश करता हैन आज खेत मेन कम करते करते अचनक मेरि कमर मे दरद उथा तो इसने अछि मलिश कि और कुछ हि देर मेन मुज़े आरम आगया" मा हनस पदि और मेरि तरफ़ अजिब नज़रोन से देखने लगि। मैन कुछ नहि कहा और सिर झुका लिया। करिब आधे घनते के बद बहन और भुवा सोने चलि गयी। मैन और मा इदर उदर कि बतेन करते रहे। करिब रात 11 बजे मा बोलि बता आज तो मेरे पैर दुख रहे हैन। कया तुम मलिश करदोगे।

दिनु :हान कयुन नहि। लेकिन आप केवल सुखि मलिश करवओगी या तेल लगकर

मा: बेता अगर तेल लगा कर करोगे तो आसनि होगि और आरम भि मिलेगा

दिनु : थिक है, लेकिन सरसोन हो तो और भि अछा रहेगा और जलदि आरम मिलेगा।

फिर मा उथ कर अपने कमरे मैन गयी और मुज़े भि अपने कमरे मेन बुला लिया। मैने कहा आप चलिये मैन पेसब करके आता हुन। मैन जब पेसब करके उनके कमरे मेन गया तो देखा मा अपनि सरि खोल रहि थि। मुज़े देख कर बोलि बेता तेल के दाग सरि पर ना लगे इसलिये सरि उतर रहि हुन। वो अब केवल बलौसे और पेत्तिसोअत मेन थि और मैन बनियन और लुनघि मेन था। मा ने तेल कि दिबि मुज़े देकर बिसतर पर सोगयी। मैन भि उनके पैर के पास बैथ कर उनके पैर से थोद पेत्तिसोअत उपर किया और तेल लगा कर मलिश करने लगा। मा बोलि बेता बदा आरम आरहा हैन। जरा पीनदलि मैन जोर लगा कर मलिश करो। मैने ने फिर उनका दयन पैर अपने कनधे मेन रख कर पिनदलि मेन मलिश करने लगा। उनका एक पैर मेरे कनधे पर था और दुसरा निचे था जिस करन मुज़े उनकि झनते और चूत के दरशन हो रहे थे कयोनि मा ने उनदेर पनती नहिन पहनि थि वैसे भि देहति लोग बरा और पनती नहिन पहनते हैन। उनकि चूत के दरशन पते हि मेरा लुनद हरकत करने लगा। मा ने अपने पेत्तिसोअत घुतनो के थोदा उप्पर कर के कहा जरा और उपर मलिश करो। मैन अब पिनदलि के उपर मलिश करने लगा और उनका पेत्तिसोअसत घुतनो के थोअ उप्पर होने के करन अब मुज़े उनकि चूत साफ़ देखै देरहि थि इस करन मेरा लुनद फूल कर लोहे कि तरहा कदा और सकत हो गया। और उनवेअर फ़दकर बहर निकलने को बेतब हो रहा था। मैन थोदा थोदा उपर मलिश करने लगा और मलिश करते करते मेरि उनगलियन कभि कभि उनकि जनगो के पस्स चलि जति थि। जब भि मेरि उनगलिअन उनके जनगो को सपरश करति तो उनके मुच से हाआ हाअ कि अवज निकलति थि। मैने उनकि और देखा तो मा कि आनखेन बनद थि। और बर बर वो अपने होनथोन पर अपनि जीब फेर रहि थि। मेने सोचा कि मेरि उनगलिओन के सपरश से मा को अजीब मजा आरहा हैन कयोन ना इस सुनेहरे मौके का फयदा उथया जये। मैने मा से कहा मा मेरे हथ तेल कि चिकनहत के करन कफ़ि फिसल रहे हैन। यदि आप को अछा नहिन लगता है तो मलिश बनद कर दुन " मा ने कहा कोइ बात नहिन मुज़े कफ़ि आरम और सुख मिल रहा हैन। फिर मैन अपने हथेलि पर और तेल लगा कर उनके घुतनो के उपर मलिश करने लगा मलिश करते करते अचनक मेरि उनगलियन उनके चूत के इलके के पस्स तौच होने लगि वो अनखेन बनद करके केवल आहेन भर रहि थि मेरि उनगलिअन उनके पेत्तिसोअत के उनदेर चूत तो छुने कि कोशिश कर रहि थि। अचनक मेरि उनगलि उनके चुत तो तौच किया मैन थोदा घबरा कर अपनि उनगलि उनके चुत से हतलि और उनकि परतिकरिया जन ने के लिया उनके चहरे कि और देख लेकिन मा कि आनखे बनद थि वो कुछ नहि बोल रहि थि। इधर मेरा लुनद सकत होकर उनदेरवेअर के बहर निकलने को बेतब हो रहा था। मैने मा से कहा मा मुज़े पेसब लगि हैन, मैन पेसब करका आता हुन फ़िर मलिश करुनगा। मा बोलि थिक है बेता, वकै तु बहुत अछा मलिश करता है। मन करता है मैन रात भर तुज़से मलिश करवौन। मैन बोलि कोइ बात नहिन आप जब तक कहोगि मैन मलिश करुनगा येह कहा कर मैन पेसब करने चला गया।

जब पेसब करके वपस आरहा था तो भुवजि के कमरे से मुज़े कुच कुच अवज सुनयी दि, उतसुकता से मैने खिदकि कि और देखा तो वोह थोदि खुलि थि मैने खिदकि से देखा कि भुवजि एक दम ननगि सोयी थि और अपने चूत मैन ककदि दल कर ककदि को उनदेर बहर कर रहि थि और मुच से हा हाआ हाअ कि अवज निकल रहि थि। येह ससीन देख कर मेरा लुनद फिर खदा होगया। मैने सोचा भुवजि कि मलिश कल करुनगा आअज सुखबिनदेर कि मा कि मलिश करता हुन कयोनकि तवा गरम है तो रोति सेख लेनि चहिये। मैन फिर मा के केमरे मेन चला गया।

मुज़े आया देख कर मा ने कहा बेता लिघत भुज़ा कर दिम लिघत चलो करदो तकि मलिश करवते करवते अगर मुज़े नीनद आगयी तो तुम भि मेरे बगल मेन सो जना। मैने तुबे लिघत बनद करके दिम लिघत चलु करदि जब वपस आया तो मा पेत के बल लेति थि और उनका पेत्तिसोअत केवल उनकि भरि भरि गानद के उपर था बकि पैरोन का हिस्सा ननगा था बिलकुल ननगा था। अब मैन हथेलि पर धेर सरा तेल लगा कर उनके पैरोन कि मलिश करने लगा पहले पिनदलि पर मलिश करता रहा फिर मैन धिरे धिरे घुतनो के उपर झनगो के पस्स चुत्तर के निचि मलिश करता रहा। पेत्तिसोअत चुतर पर होने से मुज़े उनकि झनते और गानद का छेद नज़र आरहा था। अब मैन हिम्मत कर के धिरे धिरे उनका पेत्तिसोअत कमर तक उपर करदिया मा कुछ नहिन बोलि और उनकि आनखे बनद थि। मैने सोचा सयद उनको नीनद आगयी होगि। अब उनकि गानद और चूत के बाल मुज़े साफ़ साफ़ नज़र आरहे थे। मैने हिम्मत करके तेल से भरि हुयी उनगलि उनकि गानद के छेद के उपर लगद ने लगा वो कुछ नहिन बोलि मेरि हिम्मत और बद गयी। मेरा अनगुथा उनकि चूत कि फनको को तौच कर रहा था और अनगुथे कि बगल कि उनगलि उनकि गानद के छेद को सहला रहि थि। येह सब हरकर करते करते मेरा लुनद तिघत होगया और चुत मेन घुसने के लिया बेतब हो गया। इतने मेन मा ने कहा कि बेता मेरि कमर पर भि मलिश करदो तो मैन उथकर पहले चुपके से मेरा उनदेरवेअर निकल कर उनकि कमर पर मलिश करने लगा। थोदि देर बाद मैन मा से कहा कि मा तेल से आप का बलौसे खरब होजयेगा। कया आप अपने बलौसे को थोदा उपर उथा सकति हो " येह सुनकर मा ने अपने बलौसे के बुत्तोन खोलते हुये बलौसे को उपर उथा दिया। मैन फिर मलिश करने लगा मलिश करते करते कभि कभि मेरि हथेलि सिदे से उनके बूबस तो छु जति थि। उनकि कोइ भि परतिकरिया ना देख कर मैने उनसे कहा मा अब आप सिधि सोजैये मैन अब आप कि सपेसिअल तरिके से मलिश करना चहता हुन। मा करवत बदल कर सिधि होगयी मैने देख अब भि उनकि आनखे बनद थि और उनके बलौसे के सरे बुत्तोन खुले थे और उनकि चुनची साफ़ झलक रहि थि। उनकि चुनची कफ़ि बरि बरि थी और सनसोन से सथ उथती बैथती उनकि मसत रसेली चुनची सफ़ सफ़ दिख रहि था।

मा ने अपनि सुरिली और नशिलि धिमि अवज मेरे कनो मे परि, "बेता अब तुम थक गये होनगे इनहा आऊ ना।" और मेरे पस हि लेत जऊ ना। पहले तो मैं हिचकिचया कयोन कि मैन केवल लुनघि पहनि थि और लुनघि के उनदेर मेरा लुनद चुत के लिये तदप रहा था वो मेरि परेशनि तर गयी और बोले, "कोइ बत नही, तुम अपनि बनियन उतर दो और रोज जैसे सोते हो वैसे हि मेरे पस सो जओ। शरमओ मत। आऊ ना।" मुझे अपने कन पर यकीन नही हो रहा था। मैन बनियन उतर कर उनके पस लेत गया। जिस बदन को कभि से निहरता था आज मैं उसि के पस लेता हुअ था। मा का अधननगा शरीर मेरे बिलकुल पस था। मैं ऐसे लेता था कि उनकि चुनची बिलकुल ननगी दिखयी दे रहा थि, कया हसीन नजरा था। तब मा बोलि, "इतने महिने से मलिश करवयी हुन इसलिया कफ़ि आरम मिला है। फिर उनहोने मेरा हथ पकर कर धिरे से खिनच कर अपने उभरे हुए चुनची पर रख दिया और मैं कुच नहे बोल पया लेकिन अपना हथ उनके चुनची पर रखा रहने दिया। मुझे येहन कुच कुजा रहा है, जरा सहलओ ना।" इ उनकि चुनची को सहलना शुरु किया। और कभि कभि जोर जोर से उनकि चुनची को रगरना शुरु कर दिया। मेरि हथेली कि रगर पा कर मा के निप्पले करे हो गये।

अचनक वो अपनि पिथ मेरि तरफ़ घुमा कर बोले, "बेता मेरा बलौसे खोल दो और थीक से सहलओ।" मैने कनपते हुए हथोन से मा का बलौसे खोल दिया और उनहोने अपने बदन से उसे उतर कर नीचे दल दिया। मेरे दोनो हतोन को अपने ननगी चती पर ले गा कर वो बोली, "थोरा कस कर दबओ ना।" मैं भि कफ़ि उत्तेजित हो गया और जोश मे अकर उनकि रसीली चुनची से जम कर खेलने लगा। कया बरि बरि चुनचेअ थी। करी करी चुनची और लुमबे लुमबे निप्पले। पहली बर मैं किसि औरत कि चुनची को छु रहा था। मा को भि मुझसे अपने चुनची कि मालिश करवने मे मज़ा अरहा था। मेरा लुनद अब खदा होने लगा था और लुनगि से बहर निकल आया। मेरा 9" का लुनद पुरे जोश मे आ गया था। मा कि चुनची मसलते मसलते हुए मैं उनके बदन के बिलकुल पस आ गया था और मेरा लुनद उनकि जनघो मे रगर मरने लगा था। अब उनोहने कहा बेता तुमहर तो लोहे समन होगया है और इसका सपरश से लगता है कि कफ़ि लुमबा और मोता होगा कया मैन हथ लगा कर देखुन" उनहोने पुचा और मेरे जबब देने से पहले अपना हथ मेरे लुनद पर रख कर उसको ततोलने लगी।

अपनि मुत्तही मेरे लुनद पर कस के बनद कर ली और बोले, "बपरे, बहुत करक है।" वो मेरि तरफ़ घुमि और अपना हथ मेरे लुनघ मे घुसा कर मेरे फर-फरते हुए लुनद पकर ल्लिया। लुनद को कस कर पकरे हुए वो अपना हथ लुनद के जर तक ले गयी जिस्से सुपरा बहर आगया। सुपरे कि सिज़े और अकर देख कर वो बहुत हैरन हो गयी। "बेता कहन चुपा रखा था इतने दिन ऐसा तो मेने अपनि जिनदगि मैन नहिन देखा है उनहोने पुचा। मैने कहा, "एहीन तो था तुमहरे समने लेकिन तुमने धयन नही दिया। यदि आप त्रैन मैन गहरि नीनद नहिन होति तो सयद आप देख लेति कयोनकि त्रैन मेन रात को मेरा सुपदा आप कि चुत तो लगद रहा था। मा बोलि "मुझे कया पता था कि तुमहरा इतना बरा लौरा होगा " एह मैं सोच भि नही सकती थी।" मुझे उनकि बिनदस बोले पर असचरया हुअ जब उनहोने "लौरा" कहा और सथ हि मे बरा मज़ा अया। वो मेरे लुनद को अपने हथ मे लेकर किनच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर मा ने अपना पेत्तिसोअत अपनि कमर के उपर उथा लिया और मेरे तने हुए लुनद को अपनि जनघो के बिच ले कर रगरने लगी। वो मेरि तरफ़ करबत ले कर लेत गयी तकी मेरे लुनद को थीख तरह से पकर सके। उनकि चुनची मेरे मुनह के बिलकुल पस थी और मैं उनहे कस कस कर दबा रहा था। अचनक उनहोने अपनि एक चुनची मेरे मुनह मे थेलते हुए कहा, "चुसो इनको मुनह मे लेकर।" मैने इनकि लेफ़त चुनची अपने मुनह मे भर लिया और जोर जोर से चुसने लगा। थोरे देर के लिये मैने उनकि चुनची को मुनह से निकला और बोला, "मैं तुमहरे बलौसे मे कसि चुनची को देखता था और हैरन होता था। इनको चुने कि बहुत इस्सह्हा होती थी और दिल करता था कि इनहे मुनह मे लेकर चुसु और इनका रुस पीउन। पर दरता था पता नही तुम कया सोचो और कनही मुझसे नरज़ ना हो जओ। तुम नही जनती कि तुमने मुझे और मेरे लुनद को कल रात से कितना परेशन किया है"" "अस्सह्हा तो आज अपनि तमन्ना पुरि कर लो, जी भर कर दबओ, चुसो और मज़े लो; मैं तो आज पुरि कि पुरि तुमहरी हुन जैसा चहे वैसा हि करो" मा ने कहा। फिर कया था, मा कि हरि झनदी पकर मैं तुत परा मा कि चुनची पर।

मेरि जीभ उनके करे निप्पले को महसुस कर रही थी। मैने अपनि जीभ मा के उथे हुए करे निप्पले पर घुमया। मैने दोनो अनरोन को कस के पकरे हुए था और बरि बरि से उनहे चुस रहा था। मैं ऐसे कस कर चुनचीओन को दबा रहा था जैसे कि उनका पुरा का पुरा रुस निचोर लुनगा। मा भि पुरा सथ दे रही थी। उनके मुह्ह से "ओह! ओह! अह! सि सि, कि अवज निकल रही थी। मुझसे पुरि तरफ़ से सते हुए वो मेरे लुनद को बुरि तरह से मसल रही थी और मरोर रही थी। उनहोने अपनि लेफ़त तनग को मेरे रिघत तनग के उपर चरा दिया और मेरे लुनद को को अपनि जबघो के बिच रख लिया। मुझे उनकि जनघो के बिच एक मुलयम रेशमि एहसस हुअ। एह उनकि झनतोन से बरि हुयी चूत थी। मेरा लुनद का सुपरा उनकि झनतू मे घुम रहा था। मेरा सबरा का बनध तुत रहा था। मैं मा से बोला, "भभि मुझे कुच हो रहा और मैं अपने अपे मे नही हुन, पलेअसे मुझे बतओ मैं कया करोन"" मा बोलि, "तुमने कभि किसि को चोदा है आज तक"" मैने बोला, "नही।" कितने दुख कि बत है। कोइ भि औरत इस्से देख कर कैसे मना कर सकती है।

मैं चुपचप उनके चेरे को देखते हुए चुनची मसलता रहा। उनहोने अपना मुनह मेरे मुनह से बिलकुल सता दिया और फुसफुसा कर बोली, "अपनि दोसत कि मा को चोदोगे"" "क्कक कयोन नही" मैं बदी मुसजकिल से कहा पया। मेरा गला सुच रहा था। वो बदे मदक अनदज़ मे मुसकुरा दि और मेरे लुनद को अज़द करते हुए बोले, "थीक है, लगता है अपने अनदि बेते को मुझे हि सब कुच सिखना परेगा। चलो अपनि लुनघि निकल कर पुरे ननगे हो जऊ।" मैने अपनि लुनगि खोल कर सिदे मेन फेक दिया। मैं अपने तने हिए हुए लुनद को लेकर ननग धरनग मा के समने खरा था। मा अपने रसेली होतोन को अपने दनतो मे दबा कर देखति रही और अपने परतिसोअत का नरा कीनच कर धीला कर दिया। "तुम भि इस्से उतर कर ननगी हो जओ" कहते हुए मैने उनका पेत्तिसोअत को खीनचा। मा अपने चुतर उपर कर दिया जिस्से कि पेत्तिसोअत उनकि तनगो उतेर कर अलग हो गया। अब वो पुरि तरह ननगी हो कर मेरे समने चित परि हुइ थी। उनहोने अपनि तनगो को फ़ैला दिया और मुझे रेशमि झनतो के जनगल के बिच चुपि हुए उनकि रसीले गुलबी चूत का नज़रा देखने को मिला।

निघत लमप कि हलकी रोशनि मे चमकते हुए नगे जिसम को को देखकर मैं उत्तेजित हो गया और मेरा लुनद मरे खुशि के झुमने लगा। मा ने अब मुझसे अपने उपर चरने को कहा। मैं तुरनत उनके उपर लेत गया और उनकि चुनची को दबते हुए उनके रसीले होनत चुसने लगा। मा ने भि मुझे कस कर अपने अलिनगन मे कस कर जकर लिया और चुम्मा का जवब देते हुए मेरे मुनह मे अपनि जीभ दल दि । है कया सवदिसत और रसीले जीभ थी। मैं भि उनकि जीभ को जोर शोर से चुसने लगा। हुमरा चुम्मा पहले पयर के सथ हलके मे था और फिर पुरे जोश के सथ।कुच देर तक तो हुम ऐसे हि चिपके रहे, फिर मैं अपने होनत उनकि नज़ुक गल्लोन पर रगर रगर कर चुमने लगा।

फिर मा ने मेरि पिथ पर से हथ उपर ला कर मेरा सर पकर लिया और उसे नीचे कि तरफ़ करदिया। मैं अपने होनथ उनके होनतो से उनकि थोदि पर लया और कनधो को चुमता हुअ चुनची पर पहुनचा। मैं एक बर फिर उनकि चुनची को मसलता हुअ और खेलता हुअ कतने और चुसने लगा।

उनहोने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से निकल लिया और हुमरी तनगी एक-दुसरे से दूर हो गये। अपने रिघत हथ से वो मेरा लुनद पकर कर उसे मुत्तही मे बनध कर सहलने लगी और अपने लेफ़त हथ से मेरा दहिना हथ पकर कर अपनि तनगू के बिच ले गयी। जैसे हि मेरा हथ उनकि चूत पर पहुनचा उनहोने अपनि चूत के दने को उपर से रगर दिया।

समझदर को इशरा कफ़ि था। मैं उनके चुनची को चुसता हुअ उनकि चूत को रगने लगा। "बता अपनि उनगली अनदर दलो ना"" कहति हुए मा ने मेरा उनगली अपनि चूत के मुनह पर दबा दिया। मैने अपनि उनगली उनकि चूत के दरर मे घुसा दिया और वो पुरि तरह अनदर चली गये। जैसे जैसे मैने उनकि चूत के अनदर उनगली उनदेर बहर कर रहा था मेरा मज़ा बरता गया।

जैसे हि मेरा उनगली उनके चूत के दने से तकरया उनहोने जोर से सिसकरि ले कर अपनि जनघो को कस कर बनद कर लिया और चुतर उथा उथा कर मेरे हथ को चोदने लगी।

कुछ देर बद उनकि चूत से पनि बहा रहा था। थोरि देर तक ऐसे हि मज़ा लेने के बद मैने अपनि उनगली उनकि चूत से बहर निकल लिया और सिधा हो कर उनके उपर लेत गया। उनहोने अपनि तनगे फ़ैला दि और मेरे फ़रफ़रते हुए लुनद को पकर कर सुपरा चूत के मुहने पर रख लिया। उनकि झनतो का सपरश मुझे पगल बना रहा था, फिर मा ने कहा "अब अपना लौरा मेरि बुर मे घुसओ, पयर से घुसेरना नही तो मुझे दरद होगा, अह्हह्हह!" मैं नौसिखिया था इसिलिये शुरु शुरु मे मुझे अपना लुनद उनकि तिघत चूत मे घुसने मे कफ़ि परेशनि हुयी। मैं जब जोर लगा कर लुनद अनदर दलना चहा तो उनहे दरद भि हुअ। लेकिन पहले से उनगली से चुदवा कर उनकि चूत कफ़ि गिली हो गये थी।

फिर मा ने अपने हथ से लुनद को निशने पर लगा कर रसता दिखा रही थी और रसता मिलते हि मेरा एक हि धक्के मे सुपरा अनदर चला गया। इस्से पहले कि मा समभले , मैने दुसरा धक्का लगया और पुरा का पुरा लुनद मखहन जैसे चूत कि जन्नत मे दखिल हो गया। मा चिल्लैइ, "उईई ईईईइ ईईइ माआआ उहुहुह्हह्हह ओह बता, ऐसे हि कुच देर हिलना दुलना नही, हि! बरा जलीम है तुमहरा लुनद। मर हि दला मुझे तुमने दिनु।" मैने सोचा लगता है मा को कफ़ि दरद हो रहा है।

पहेलि बर जो इतना मोता और लुमबा लुनद उनके बुर मे घुसा था। मैं अपना लुनद उनकि चूत मे घुसा कर चुप चप पदा था। मा कि चूत फदक रही थी और अनदर हि अनदर मेरे लौरे को मसल रही थी। उनकि उथि उथि चुनचेअन कफ़ि तेज़ि से उपर नीचे हो रहे थी। मैने हथ बरहा कर दोनो चुनची को पकर लिया और मुनह मे लेकर चुसने लगा। थोदि देर बद मा को कुच रहत मिलि और उनहोने कमर हिलनि शुरु कर दि और मुझसे बोलि, "बेता शुरु करो, चोदो मुझे। लेलो मज़ा जवनी का मेरे रज्जज्जा," और अपनि गनद हिलने लगी।

मैं थोदा अनारी। समझ नहिन पया कि कैसे शुरु करुन। पहले अपनि कमर उपर किया तो लुनद चूत से बहर आ गया। फिर जब नीचे किया तो थीक निशने पर नही बैथा और भभि कि चूत को रगरता हुअ नीचे फिसल कर गनद मे जकर फनस गया। मैने दो तीन धक्के लगया पर लुनद चूत मे वपस जने बजै फिसल कर गनद मे चला जता। मा से रहा नही गया और तिलमिला कर तना देति हुइ बोलि, " अनारी से चोदवना और चूत का सतयनश करवना होता है, अरे मेरे भोले दिनु बेते जरा थीक से निशना लगा कर अनदर दलो नही तो चूत के उपर लौरा रगर रगर कर झर जऊगे।" मैं बोला, " अपने इस अनारी बेते को कुच सिखओ, जिनदगी भर तुमहे अपना गुरु मनुगा और जब चहोगि मेरे लुनद कि दक्षिना दुनगा।"

मा लुमबी सनस लेति हुए बोलि, "हन बेते, मुझे हि कुच करना होगा नही तो और मेरा हथ अपनि चुनची पर से हतया और मेरे लुनद पर रखती हुइ बोले, "इस्से पकर कर मेरि चूत के मुनह पर रखहो और लगओ धक्का जोर से।" मैने वैसे हि किया और मेरा लुनद उनकि चूत को चिरता हुअ पुरा का पुरा अनदर चला गया। फिर वो बोलि, "अब लुनद को बहर निकलो, लेकिन पुरा नही। सुपरा अनदर हि रहने देना और फिर दोबरा पुरा लुनद अनदर पेल देना, बस इस्सि तरह से करते रहो।" मैने वैसे हि करना शुरु किया और मेरा लुनद धिरा धिरे उनकि चूत मे अनदर-बहर होने लगा। फिर मा ने सपीद बरहा कर करने को कहा। मैने अपनि सपीद बरहा दी औए तज़ी से लुनद अनदर-बहर करने लगा। मा को पुरि मसती आ रही थी और वो नीचे से कमर उथा उथा कर हर शोत का जवब देने लगी। लेकिन जयदा सपीद होने से बर बर मेरा लुनद बहर निकल जता। इस्से चुदै का सिलसिला तुत जता।

अखिर मा से रहा नही गया और करवत ले कर मुझे अपने उपर से उतर दिया और मुझको चित लेता कर मेरे उपर चर गयी।

अपनि जनघो को फ़ैला कर बगल कर के अपने गद्देदर चुतर रखकर बैथ गयी। उनकि चूत मेरे लुनद पर थी और हथ मेरि कमर को पकरे हुए थी और बोले, "मैं दिखती हुन कि कैसे चोदते है," और मेरे उपर लेत कर धक्का लगया। मेरा लुनद घप से चूत के अनदर दखिल हो गया। मा ने अपनि रसीलि चुनची मेरि चती पर रगरते हुए अपने गुलबी होनत मेरे होनत पर रख दिया और मेरे मुनह मे जीभ दल दिया। फिर उनहोने मज़े से कमर हिला हिला कर शोत लगना शुरु किया। बरे कस कस कर शोत लगा रही थी। चूत मेरे लुनद को अपने मे समये हुए तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुनच गया हुन। अब पोसितिओन उलती हो गयी थी। मा मनो मरद थी जो कि अपनि मसुका को कस कस कर चोद रहा था। जैसे जैसे मा कि मसती बरह रही थी उनके शोत भि तेज़ होते जा रहे थे।

अब वो मेरे उपर मेरे कनधो को पकर लर घुतने के बल बैथ गयी और जोर जोर से कमर हिला कर लुनद को तेज़ी से अनदर-बहर लेने लगी। उनका सरा बदन हिल रहा था और सनसे तेज़ तेज़ चल रही थी। मा कि चुनचीअ तेज़ि से उपर नीचे हो रही थी। मुझसे रहा नही गया और हथ बरहा कर दोनो चुनची को पकर लिया और जोर जोर से मसलने लगा।

मा एक सधे हुए खिलरि कि तरह कमन अपने हतोन मे लिये हुए कस कस कर शोत लगा रही थी। जैसे जैसे वो झरने के करीब अ रही थी उनकि रफ़तर बरहति जा रही थी। कमरे मे फच फच कि अवज गुनज रही थी। जब उनकि सनस फुल गयी तो खुद नीचे अकर मुझे अपने उपर किनच लिया और तनगो को फ़ैला कर उपर उथा लिया और बोले, "मैं थक गयी मेरे रज्जज्जा, अब तुम मोरचा समभलो।"मैं झत उनकि जनघो के बिच बैथ गया और निशना लगा कर झतके से लुनद चुत के अनदर दल दिया और उनके उपर लेत कर दनदन शोत लगने लगा। मा ने अपनि तनग को मेरि कमर पर रख कर मुझे जकर लिया और जोर जोर से चुतर उथा उथा कर चुदै मे सथ देने लगी। मैं भि अब उतना अनारी नही रहा और उनकि चुनची को मसलते हुए दनदन शोत लगा रहा था। पुरा कमरा हुमरि चुदै कि अवज से गुनज उथा था। मा अपनि कमर हिला कर चुतर उथा उथा कर चुदा रही थी और बोले जा रही थी, "अह्हह आअह्हह्हह उनह्हह्ह ऊओह्हह्ह ऊऊह्हह्हह हाआआन हाआऐ मीईरे रज्जज्जजा, माआआअर गयययययये रीईए, लल्लल्लल्ला चूऊओद रे चूऊओद। उईईईई मीईईरीईइ माआअ, फाआआअत गाआआयीई रीईई आआआज तो मेरि चूत। मीईएरा तो दम निक्कक्ककल दिया तूऊउने तूऊ आआज। बराआअ जाआअलीएम हाआऐरे तूऊमहाआआरा लौरा, मैं भि बोल रहा था, "लीईए मेरीईइ रनीई, लीई लीईए मेरा लौरा अपनीईइ चुत मीईए। बराआअ तरपयययययया है तुनीई मुझीई। लीईए लीई, लीई मेरीईइ राआआआआनि येह लुनद अब्बब्बब तेराआ हीई है। अह्हह्हह्ह! उह्हह्हह्हह्ह कया जन्नत का मज़ाआअ सिखयाआअ तुनीईए।

मैं तो तेराआअ गुलम हूऊऊ गयाआ।"मा गनद उचल उचल कर मेरा लुनद अपने चूत मे ले रही थी और मैं भि पुरे जोश के सथ उनकी चुनचेओन को मसल मसल कर अपने गहरे दोसत कि मा कि गहरि चुदै कर रहा था।

मा मुझको ललकर कर कहति, लगओ शोत मेरे रजा", और मैं जवब देता, "येह ले मेरि रनि, ले ले अपनि चूत मे"। "जरा और जोर से सरकओ अपना लुनद मेरि चूत मे मेरे रजा", "येह ले मेरि रनि, येह लुनद तो तेरे लिये हि है।" "देखो रज्जज्जा मेरि चूत तो तेरे लुनद कि दिवनी हो गयी, और जोर से और जोर से आआईईईईए मेरे रज्जज्जज्जजा। मैं गयीईईईईए रीई," कहते हुए मा ने मुझको कस कर अपनि बहोन मे जकर लिया और उनकि चूत ने जवलमुखि का लवा चोर दिया। अब तक मेरा भि लुनद पनि चोरने वला था और मैं बोला, "मैं भि अयाआआ मेरि जाआअन," और मेने भि अपना लुनद का पनि चोर दिया और मैं हफ़ते हुए उनकि चुनची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेत गया। येह मेरि पहलि चुदै थी। इसिलिये मुझे कफ़ि थकन महसुस हो रही थी। मैं मा के सिने पर सर रख कर सो गया। वो भि एक हथ से मेरे सिर को धिरे धिरे से सहलते हुए दुसरे हथ से मेरि पिथ सहला रही थी।

कुच देर बद होश अया तो मैने उनके रसेले होनतोन के चुमबन लेकर उनहे जगया। मा ने करवत लेकर मुझे अपने उपर से हतया और मुझे अपनि बहोन मे कस कर कन मे फुस-फुसा कर बोलि, "बता तुमने और तुमहरे मोते लमबे लुनद तो कमल कर दिया, कया गजब का तकत है तुमहरे लुनद मे।" मैने उत्तेर दिया, "कमल तो अपने कर दिया है , आजतक तो मुझे मलुम हि नही था कि अपने लुनद को कैसे इसतिमल कैसे करना है। येह तो अपकि मेहेरबनि है जो कि अज मेरे लुनद को अपकि चूत कि सेवा करने का मौका मिला।" अबतक मेरा लुनद उनकि चूत के बहर झनतो के जनगल मे रगर मर रहा था। मा ने अपनि मुलयम हथेलिओन मे मेरा लुनद को पकर कर सहलना शुरु किया। उनकि उनगली मेरे अनदवे से खेल रहि थी। उनकि नजुक उनगलिओन के सपरश पकर मेरा लुनद भि जग गया और एक अनगरैए लेकर मा कि चूत पर थोकर मरने लगा। मा ने कस कर मेरा लुनद को कैद कर लिया और बोलि, "बहुत जन तुमहरे लुनद मे, देखो फिर से फर-फरने लगा, अब मैं इसको नहिन छोरुनगी।"

हुम दोनो अगल बगल लेते हुए थे। मा ने मुझको चित लेता दिया, और मेरि तनग पर अपनि तनग चरा चरा कर लुनद को हथ से उमेथेने लगी। सथ हि सथ अपनि कमर हिलते हुए अपनि झनत और चूत मेरि जनघ पर रगरने लगी। उनकि चूत पिचली चुदै से अभितक गिलि थी और उसका सपरश मुझे पगल बनै हुए था। अब मुझसे रहा नही गया और करवत लेकर भभि कि तरफ़ मुनह करके लेत गया। उनकि चुनची को मुनह मे दबा कर चुसते हुए अपनि उनगली चूत मे घुसा कर सहलने लगा। उनहोने एक सिसकरि लेकर मुझसे कस कर चिपत गयी और जोर जोर से कमर हिलते हुए मेरि उनगली से चुदवने लगी। अपने हथ से मेरे लुनद को कस कर जोर जोर से मुथ मर रही थी।

मेरा लुनद पुरे जोश मे अकर लोहे कि तरह सकथ हो गया था। अब मा को हध से जयदा बेतबि बरह गयी थी और कुहद चित हो कर मुझे अपने उपर किनच लिया। मेरे लुनद को पकर कर अपनि चूत पर रखती हुइ बोले, "आऊ मेरे रजा, सेसोनद रौनद हो जये।"मैने झत कमर उथा कर धक्का दिया और मेरा लुनद उनकि चूत को चिरता हुअ जर तक धनस गया। मा चीलह उथी और बोले, "जीओ मेरे रजा, कया शोत मरा। अब मेरे सिखये हुए तरीके से शोत पर शोत मरो और फर दो मेरि चूत को।" मा का अदेश पा-कर मैं दुने जोश मे आ गया और उनकी चुनची को पकर कर हुमच हुमच कर मा कि चूत मे लुनद पेलने लगा। उनगली कि चुदै से उनकि कि चूत गिलि हो गयी थी और मेरा लुनद सतसत अनदर-बहर हो रहा था। वो भि नीचे से कमर उथा उथा कर हर शोत का जवब पुरे जोश के सथ दे रही थी।

मा ने दोनो हतोन से मेरि कमर को पकर रखहा था और जोर जोर से अपन चूत मे लुनद घुसवा रही थी। वो मुझे इतना उथति थी कि बस लुनद का सुपरा अनदर रहता और फिर जोर नीचे किनचती हुई घप से लुनद चूत मे घुसवा लेती थीन। पुरे कमरे मे हुमरी सनस और घपा-घप, फच-फच कि अवज गुनज रही थी। जब हुम दोनो कि तल से तल मिल गयी तब मा ने अपने हथ नीचे लकर मेरे चुतर को पकर लिया और कस कस कर दबोचतै हुए मज़ा लेने लगी। कुच देर बद मा ने कहा, "आऊ एक नया असन सिखती हुन," और मुझे अपने उपर से हता कर किनरे कर दिया। मेरा लुनद "पक" कि अवज सथ बहर निकल आया। मैं चित लेता हुअ था और मेरा लुनद पुरे जोश के सथ सिधा खरा था। मा उथ कर घुतनो और हथेलिओन पर मेरे बगल मे बैथ गयी। मैं लुनद को हथ मे पकर कर उनकि हरकत देखता रहा। मा ने मेरा लुनद पर से हथ हता कर मुझे खिनचते हुए कहा, "ऐसे पदे पदे कया देख रहे हो, चलो अब उथ कर पीचे से मेरि चूत मे अपनि लुनद को घुसओ।" मैं भि उथ कर उनके के पीचे आकर घुतने के बल बैथ गया और लुनद को हथ से पकर कर उनकि चूत पर रगरने लगा। कया मसत गोल गोल गद्दे दर गनद थी। मा ने जनघ को फैला कर अपने चुतर उपर को उथा दिये जिस्से कि उनकि रसीलि चूत सफ़ नज़र आने लगी। उनका का इशरा समझ कर मैने लुनद का सुपरा उनकि चूत पर रख कर धक्का दिया और मेरा लुनद उनकि चूत को चिरता हुअ जर तक धनस गया।

मा ने एक सिसकरी भर कर अपनि गनद पीचे कर के मेरि जनघ से चिपका दी। मैं भि मा कि पिथ से चिपक कर लेत गया और बगल से हथ दल कर उनकि दोनो चुची को पकर कर मसलने लगा। वो भि मसती मे धिरा धिरा चुतर को अगे-पीचे करके मज़े लेने लगी। उनके मुलयम चुतर मेरि मसती को दोगुना कर रही थी। मेरा लुनद उनकि रसीलि चूत मे अरम से अगे-पीचे हो रहा था।

कुच देर तक चुदै का मज़ा लेने के बद मा बोलि, "सहलो रज्जजा अब अगे उथा कर शोत लगओ, अब रहा नही जता।" मैं उथा कर सीधा हो गया और मा के चुतर को दोनो हथोन से कस कर पकर कर चूत मे हमला शुरु कर दिया। जैसा कि मा ने सिखया था मैं पुरा लुनद धिरे से बहर निकल कर जोर से अनदर कर देता। शुरु मे तो मैने धिरे धिरे किया लेकिन जोश बरहता गया और धक्को कि रफ़तर बरहती गयी। धक्का लगते समय मैं मा के चुतर को कस के अपनि अऊर कीनच लेता तकि शोत तगरा परे। मा भि उसि रफ़तर से अपने चुतर को अगे-पीचे कर रही थी। हुम दोनो कि सनसे तेज हो गयी थी। भभि कि मसती पुरे परवन पर थी। ननगे जिसम जब अपस मे तकरते तो घप-घप कि अवज आती। कफ़ि देर तक मैं उनही अमर पकर धक्का लगता रहा। जब हलत बेकबू होने लगी तब मा को फिर से चित लेता कर उन पर सवर हो गया और चुदै का दौर चलू रखा। हुम दोनो ही पसीने से लथपथ हो गये थी पर कोई भि रुकने का नम नही ले रहा था। तभि मा ने मुझे कस कर जकर लिया और अपनि तनगे मेरे चुतर पर रख दिया और कस कर जोर जोर से लमर हिलते हुए चिपक कर झर गयी। उनके झरने के बद मैं भि भभि कि चुनची को मसलते हुए झर गया और हफ़तेन हुए उनके उपर लेत गया। हुम दोनो कि सनसे जोर जोर से चल रही थी और हुम दोनो कफ़ि देर तक एक-दुसरे से चिपक कर परे रहे। कुच देर बद भभि बोले, "कयोन बता कैसी लगी हुमरि चूत कि चुदै"" मैं बोला, "है मेरा मन करता है कि जिनदगी भर इस्सि तरह से तुमहरी चूत मे लुनद दले पदा रहुन।" मा बोलि"जब तक तुम यहन हो, येह चूत तुमहरी है, जैसे मरज़ी हो मज़े लो, अब थोरे देर आरम करतेन है।" "नही मा, कम से कम एक बर और हो जै।

देखो मेरा लुनद अभि भि बेकरर है।" मा ने मेरे लुनद को पकर कर कहा, "येह तो ऐसे रहेगा हि, चूत कि खुसबु जो मिल गयी है। पर देखो रत के तीन बज गये है, अगर सुबह तिमे से नही उथेन तो तुमहरि भुवजि को शक गयेगा। अभि तो सरा दिन समने है और अगे के इतने दिन हुमरे है। जी भर कर मसती लेना। मेरा कहा मनोगे तो रोज नया सवद चकुनगी।" मा का कहना मान कर मैने भि जीद चोर दी और मा भि करवत ले कर लेत गयी और मुझे अपनेसे सता लिया। मैने भि उनकि गनद कि दरर मे लुनद फनसा कर चुनचीओन को दोनो हथोन मे पकर लिया और मा के कनधे को चुमता हुअ लेत गया।

नीनद कब अयी इसका पता हि नही चला।
सुबह जब अलरम बजा तो मैने समय देखा, सुबह के सत बज रहे थी। मा ने मुसकुरा कर देखा और एक गरमा-गरम चुमबन मेरे होतोन पर जद दिया। मैने भि मा को जकर कर उनके चुमबन का जोरदर का जवब दिया। फिर मा उथ कर अपने रोज के कम कज मे लग गयी। वो बहुत कुश थी।

मैन उथ कर नहा धोकर फ़रेश होकर आनगन मैन बैथ कर नसता करने लगा। तभि भुवजि आगयी। और बोलि बेता खेत चलोगे " मैने कहा कयोन नहिन और रात वला उनका ककदि से चोदनेका ससीन मेरे आनखोन के समने नचने लगा। इतने मे सुमन (दोसत कि बहन) बोलि मैन भि तुमहरे साथ खेत मैन चलुनगि। और हुम तिनो खेत कि और चल पदे। रसते मैन जब हुम एक खेत के पस्स से गुजर रहे थे तो देखा कि उस खेत मैन ककदियन उगि हुयी थि। मैने ककदियोन को देखते हुवे भुवजि से कहा "भुवजि देखो इस खेत वले ने तोह ककदियन उगै हैन। और ककदियोन मैन कफ़ि गून होते हैन" भुवजि लमबि सनस भरति हुयी बोलि "हान बेता ककदियोन से कफ़ि फयदा होता हैन और कै कमो मेन इसका उपयोग किया जता हैन, जैसे सलद मेन, सुबजियोन मेन, कच्चि ककदि खने के लिये भि इसका उपलोग किया जता हैन" मैन बोला "हान भुवजि, इसे कै तरह से उपयोग मेन लया जता है" इसतरह कि बतेन करते करते हुम लोनग अपने खेत मेन पहुनच गये। वहन जकर मैन मकन मैन गया और लुनघि और बनियन पहन कर वपन भुवजि के पस्स आगया। भुवजि खेत मैन काम कर रहि थि और सुमन (दोसत कि बहन) उनके काम मैन मदद कर रहि थि। मैने देखा भुवजि नि सरि घुतनो के उपर थि और सुमन सकिरत और बलौसे पहने हुवे थि। मैन भि लुनघ उनचि करके (मदरसि सतयले मेन) उनके साथ कम मेन मदद करने लगा। जब सुमन झुकर कम करति तो मुज़े उसकि चद्दि देखै देति थि। हुम लोग करिब 1 या 1:30 घनते कम करते रहे फिर मैन भुवजि से कहा भुवजि मैन थोदा आरम करना चहता हुन तो भुवा बोलि थिक हैन और मैन खेत के मकन मेन अकर अरम करने लगा। कुछ देबद कमरे मैन सुमन आयी और कहने लगि दिनु भैया आप वहन बैथ जैये कयोन कि कमरे मैन झरू मरनि हैन। और मैन कमरे के एक कोने मैन बैथ गया। और वो कमरे मैन झरू मरने लगि। झरू मरते समय जब सुमन झुकि तो फिर मुज़े उसकि चद्दि दिखै देने लगि। और उसकि चुदै के खयलोन मैन खो गया। तोदि देर बद फिर वो बोलि "भैया जरा पैर हता लो झरू देनि है।" मैं चौनक कर हक्किकत कि दिनिउअ मे वपस आया। देखा सुमन कमर पर हथ रखी मेरे पस खरी है। मैं खरा हो गया और वो फिर झुक कर झरू लगने लगी। मुज़े फिर उसकि चद्दि दिखयी देने लगि। आज से पहले मैने उस पर धयन नही दिया था।। पर आज कि बत हि कुच और हि थी। रात मा से चुदै कि त्रैनिनग पकर एक हि रत मे मेरा नज़रिअ बदल गया था। अब मैं हर औरत को चुदै कि नज़रिअ से देखना चहता था। जब वो झरू लगा रहि थि तोह मैन उसके समने अकर खदा होगया अब मुज़े उसके बलौसे से उसकी चुनची सफ़ दिखयी दे रही थी। मेरा लुनद फन-फना गया। रत वली मा जैसि चुनची मेरे धिमक के समने घुमने लगि।

तभि सुमन कि नज़र मुझ पर परी। मुझे एकतक घुरता पकर उसने एक दबी से मुसकन दी और अपना बलौसे थिक कर चुनचेओन को बलौसे के अनदर चुपा लिया। अब वो मेरि तरफ़ पीथ कर के झरू लगा रही थी। उसके चुतर तो और भि मसत थी। मैं मन हि मन सोचने लगा कि इसकि गनद मे लुनद घुसा कर चुनची को मसलते हुए चोदने मे कितना मज़ा अयेगा। बेखयली मे मेरा हथ मेरे तन्नये हुए लुनद पर पहुनच गया और मैं लुनघि के उपर से हि सुपरे को मसलने लगा। तभि सुमन अपना कम पुरा कर के पलती और मेरे हरकत देख कर मुनह पर हथ रख कर हनसती हुई बहर चली गयी।

तोदि देर बद भुवजि और सुमन हाथ पैर धोकर आये और मुज़े कहा कि चलो दिनु बेते खना खलो। अब हुम तीनो खना खने बैथ गये। भुवजि मेरे समने बैथि थि और सुमन मेरे लेफ़त सिदे कि ओर बैथि थि। सुमन पलथि मरके बैथि थि और भुवजि पैर पसरे बैथि थि। खना खते समय मैने कहा भुवजि आज खना तो जयेकेदर बना है। भुवजि ने कहा मैने तुमहरे लिये खस बनया हैन। तुम यहन जितने दिन रहोगे गावँ का खना खा खा और मोते होजओगे। मैन हनस पदा और कहा अगर जयदा मोता हौनगा तो मुसकिल हो जये गि। भुवजि अनद सुमन हनस पदि। थोदि देर बद भुवजि ने कहा सुमन तुम खना खा कर खेत मैन खद दर आना। मैन थोदा अरम करुनगि। हुम सब ने खना खया सुमन बरतन धो कर खेत मैन खद दलने लगि। मैन और भुवजि चतै बिछा कर अर्रम करने लगे। मुज़े नीनद नहिन आरहि थि। आज मैन भुवजि या सुमन को चोदने का विचर बना रहा था। विचर करते करते कब नीनद आगयी पता हि नहिन चला। जब मेरि नीनद खुलि तो शम के करिब 5 बज रहे थे। मैने देखा कि मेरा मोता लुनद लुनद तन कर कदा था और लुनघि से बहर निकल कर मुज़े सलमि दे रहा था। इतने मेन भुवजि कमरे मैन आयी मैन झत से आनखे बनद करलिया।

थोदि देर बद थोदि आनख खोल कर देखा कि भुवजि कि नज़र मेरे खदे हुवे मोते लुनद पर तिकि थि। हैरत भरि निगहोन से मेर लुमबे और मोते लुनद को देख रहि थि। कुछ देर बद उनहोने अवज दे कर कहा "दिनु बेता उथ जओ अब घर चलना है" मैने कहा थिक है और उथकर बैथ गया मेरा लुनद अब भि लुनगि से बहर था। भुवजि मेरि और देखते हुवे बोलि "दिनु बेता कया तुमने कोइ बुरा सपना देखा था कया " मैन मुसकिल से कहा नहिन तो भुवजि, कयोन कया हुवा। वो बोलि नीचे तो देखो कया दिख रहा हैन। जब मैने निचे देखा तो मेरा लुनद लुनगि से निकला हुव था। मैन शरम से लल हो कर अपना लुनद उनदेरवेअर मैन छुपा लिया। ऐसा करते समे भुवजि हनस रहि थि। हुम करिब 6:30 बजे घर पहुनचे। रसते भर कोइ भि बात चित नहिन हुयी। घर आकर मैने कहा कि मैन बज़ार होके आता हुन और फिर बज़ार जकर 1 विशकी कि बोत्तले ले आया। जब घर पहुनचा तो रात के 9 बज रहे थे।मुज़े आया देख कर भुवजि ने अवज़ दि बेता आकर खना खलो मैन बोला भुवजि अभि भुक नहिन हैन थोदि देर बद खा लुनगा। फिर मैने पुछा मा और सुनमा कहन हैन (कयोनकि मा और सुमन ना तो रसोइ घर मेन थे नहिन आगन मेन थे) भुवजि ने कहा कि हमरे रिसतेदर के यहन आज रात भर भजन और किरतन हैन इसलिये भभि और सुमर रिसतेदर के यहन गये हैन और सुबह 5-6 बजे लोतेनगे। मैने कहा "थिक हैन भुवजि, अगर आप बुरा ना मनो तोह कया मैन थोदि विशकेय पी सकता हुन " भभि बोलि "थिक हैन तुम आनगन मेन बैथो मैन वहिन खना लेकर आति हुन। मैन आनगन मेन बैथ कर विशकेय पिने लगा। करिब आधे घनते बाद भुवजि खना लेकर आयी तब तक मैन 3-4 पेग पी चुक्का था और मुज़े थोदा विशकेय का नसुमन होने लगा था। भुवजि और मैन खना खने के बद, भुवजि के कमरे मेन आगये। मैने पनत तो शिरत निकल कर लुनगि और बनियन पहन ली। भुवजि भि सरि खोल कर केवल निघती पहनि हुयी थि। जब भुवजि खदि होकर पनि लने गयी तो मुज़े उनके परदरशि निघती से उनका सरिर दिखयी दिया। उनहोने निघती के अनदर ना तो बलौसे पहना था नहिन पेत्तिसोअत पहना था इसलियेल इघत कि रोसनि के करन उनका जिसम निघती से झलक रहा था। जब वो पनि लेकर वपस आयी। हुम बैथ कर बतेन करने लगे।

भुवजि: दिनु कया तुम सहर मेन कसरत करते हो "

दिनु: हान भुवजि रोज सुबहा उथकर कसरत करता हुन।

भुवजि: इसलिये तुमहरा एक एक अनग कफ़ि तगदा और तनदुरसत हैन। कया तुम अपने बदन पर तेल लगा कर मलिश करते हो खस तोर पर सरिर के निचले हिसेन पर "

दिनु: मैन हर रोज़ अपने बदन पर सरसोन का तेल लगा कर खूब मलिश करता हुन।

भुवजि: हान आज मैने तुमहर सरिर के अलवा अनदर का अनग भि दोपहर को देखा था वकै कफ़ि मोता लमबा और तनदुरसत है। हर मरदोन का इस तरहा का नहिन होता हैन।

भुवजि कि बात सुन कर मैन सरम के मरे लल हो गया। पुरे मकन मैन हुम दोनो अकेले थे। और इसतरह कि बातेन करते थे।

मैने भि भुवजि कि से कहा। भुवजि आप भि बहुत सुनदर हो और आपका बदन भि सुदोल है।

भुवजि: दिनु मुज़े तद के झद पर मत चदओ। तुमने तोह अभि मेरा बदन पुरा तरह देखा हि कहन हैन। मैने बोला आप ने तोह मुज़े दिखया हि नहिन और मेरे सरिर के निचले हिस्से का दरशन भि कर लिया। इतना सुनते हि वो झत बोलि मुज़े कहन अछि तरह कहन तुमहर दरशन हुवा। चलो एक शरत पर तुमे मेरे अनदुरुनि भग दिखा दुनगि अगर तुम मुज़े अपना दिखओगे तो "

मैन झत से लुनगि से लुनद निकल कर उनहे दिखा दिया। भुवजि भि अपने वदे के अनुसर निघती उपर कर के अपनि चूत दिखा दि और मुसकरति बोलि रजा बेता खुश हो अब। है जलीम चूत थि। चूत देखते हि मेरा लुनद तन कर फरफरने लगा। कुच देर तक मेरे लुनद कि और देखने के बद भुवजि मेरे पास आयी और झत से मेरि लुनगि खोल दी। फिर खरे होकर अपनि निघती भि उतर दी और ननगी हो गयी। फिर मुझे कुरसि से उथ कर पलनग पर बैथने को कहा। जब मैं पलनग पर बैथ कर भुवजि कि मसत रसिली चुनची को देख रहा था तो मरे मसती के मेरा लुनद चत कि और मुनह उथये उनकि चूत को सलमि देरहा था। भुवजि मेरि झनगोन के बिच बैथ कर दोनो हथोन से मेरे लौरे को सहलने लगी। कुच देर उनही सहलने के बद अचनक भभि ने अपना सर नीचे झुकया और अपने रसीले होनतोन से मेरे सुपरे को चुम कर उसको मुनह मे भर लिया। मैं एकदम चौनक गया। मैने सपने मे भि नही सोचा था कि ऐसा होगा।

"भुवजि एह कया कर रही हो। मेरा लुनद तुमने मुनह मे कयोन ले लिया है।" "चुसने के लिये और किस लिये" तुम अरम से बैथे रहो और बुस लुनद चुसै का मज़ा लो। एक बर चुसवा लोगे फिर बर-बर चुसने को कहोगे।" भुवजि मेरे लुनद को लोल्लिपोप कि तरह मुनह ले लेकर चुसने लगी।मैं बता नही सकता हुन कि लुनद चुसवने मे मुझे कितना मज़ा आ रहा था। भुवजि के रसीले होनत मेरे लुनद को रगर रहे थे। फिर भुवजि ने अपना होनत गोल कर के मेरा पुरा लुनद अपने मुनह मे लेलिया और मेरे अनदोयोन को हथेलि से सहलते हुए सिर उपर नीचे करना शुरु कर दिया मनो वो मुनह से हि मेरा लुनद को चोद रही हू। धिरे-धिरे मैने भि अपनी कमर हिला कर भुवजि के मुनह को चोदना शुरु कर दिया। मैं तो मनो सतवेन आसमन पर था। बेतबि तो सुबह से हि हो रहि थी। थोरि हि देर मे लगा कि मेरा लुनद अब पनी चोर देगा। मैं किसि तरह अपने उपर कबु कर के बोला, "भुवजीईईई मेरा पनि चुतने वला है।" भुवजि ने मेरे बतोन का कुच धयन नही दिया बलकी अपने हतोन से मेरे चुतर को जकर कर और तेज़ी से सिर उपर-नीचे करना शुरु कर दिया। मैं भि उनके सिर को कस कर पकर कर और तेज़ी से लुनद उनके मुनह मे पेलने लगा। कुच हि देर बद मेरे लुनद ने पनि चोर दिया और भुवजि ने गतगत करके पुरे पनि पी गयी। सुबह से कबु मे रखा हुअ मेरा पनि इतना तेज़ी से निकला कि उनके मुनह से बहर निकल कर उनके थोदि पर फैल गया। कुच बुनदे तो तपक कर उनकि चुनची पर भि जा गिरा। झरने के बद मेने अपना लुनद निकल कर भुवजि के गल्लोन पर रगर दिया। कया खुबसुरत नज़रा था। मेरा विरया भुवजि के मुनह गल होनत और रसीले चुनची पर चमक रहा था।

भुवजि ने अपनि गुलबि जीभ अपने होतोन पर फिरा कर वनहा लगा विरया चता और फिर अपनि हथेलि से अपनी चुनची को मसलते हुए पुचा, "कयोन दिनु बेता मज़ा अया लुनद चुसवने मे"" मैन बोला "बहुत मज़ा अया भुवजि, तुमने तो एक दुसरी जन्नत कि सैर करवा दिया मेरि जान। आज तो मैं तुमहरा सत जनमो के लिये गुलम हो गया। कहो कया हुकम है।" भुवजि बोलि"हुकम कया, बुस अब तुमहरी बरि है।"मैन कहा "कया मतलब, मैं कुच समझा नही"" भुवजि बोलि "मतलब एह कि अब तुम मेरि चूत चतो।" एह कहा कर भुवजि खरि हो गयी और अपनि चूत मेरे चेहेरे के पस ले आई। मेरे होनत उनकि चूत के होनतोन को चुने लगी। भुवजि ने मेरे सिर को पकर कर अपनि कमर आगे कि और अपनि चूत मेरे नक पर रगरने लगी। मैने भि उनकि चुतर को दोनो हतोन से पकर लिया और उनकि गनद सहलते हुए उनकि रसिली चूत को चुमने लगा।

भुवजि कि चूत कि पयरि-पयरि खुसबु मेरे दिमग मे छने लगा। मैन दिवनो कि तरह उनकि चूत और उसके चरो तरफ़ के इलके को चुमने लगा। बिच-बिच मे मैं अपनि जीभ निकल कर उनकि रनो को भि चत लेता। भुवजि मसती से भर कर सिसकरी लेते हुए अबपनि चूत को फ़ैलते हुये बोलि, "है रजा अह्हह्हह! जीभ से चतो ना। अब और मत तरपओ रजा। मेरि बुर को चतो।

दल दो अपनि जीभ मेरि चूत के अनदर। अनदर दल कर जीभ से चोदो।" अब तक उनकि नशेली चूत कि खुसबू मुझे बुरी तरह से पगल बना दिया था। मैने उनकि चूत पर से मुनह उथै बिना उनहे खिनच कर पलनग पर बैथा दिया और उनक्कि जनघो को फैला कर अपने दोनो कनधोन पर रख लिया और फिर अगेय बरह कर उनकि चूत कि होनतोन को अपनि जीभ से चतना शुरु कर दिया। भुवजि मसती से बरबरने लगी और अपनि चुतर को और अगेय खिसका कर अपनि चूत को मेरे मुनह से बिलकुल सता दिया। अब भुवजि के चुतर पलनग से बहर हवा मे झुल रही थी और उनकि मखमली जनघोन का पुरा दबब मेरे कनधोन पर था। मैने अपनि जीभ पुरी कि पुरी उनकि चूत मे दल दिया और चूत कि अनदरुनी दिवलोन को जीभ से सहलने लगा। भुवजि मसती से तिलमिला उथी और अपने चुतर उथा उथा कर अपनी चूत मेरि जीभ पर दबने लगी। "है रजा, कया मज़ा आ रहा है।

अब अपनि जीभ को अनदर-बहर करो नाआअ! चोदो रजाआअ चोदूऊओ! अपनि जीभ से चोदो मुझे। है रजा तुम हि तो मेरे असली सैयन हो। पहले कयोन नही मिले, अब सरि कसर नीकलुनगी। है रजा चोदो मेरि चूत को अपनि जीभ से।" मुझे भि पुरा जोश आ गया और भुवजि कि चूत मे जलदी जलदी जीभ अनदर-बहर करते हुए उसे चोदने लगा। भुवजि अभि भि जोर-जोर से कमर उथा कर मेरे मुनह को चोद रही थी। मुझे भि इस चुदै से का मज़ा अने लगा। मैने अपनि जीभ कदि कर के सिर अगे पीचे कर के भुवजि कि चूत को चोदने लगा। उनका मज़ा दोगुना हो गया। अपने चुतर को जोर-जोर से उथती हुए बोले, "और जोर से बेता और जोर से, है मेरे पयरे रजा आज मैं तेरि रदि भुवा हो गयी। जिनदगी भर के लिये चुदवनगी तुझसे। अह्हह! उईई माआ!" वो अब झरने वलि थी। वो जोर जोर से चिल्लते हुए अपनि चूत मेरे पुरे चेहेरे पर रगर रही थी।

मैं भि पुरि तेज़ी से जीभ लप-लपा कर उनकि चूत पुरी तरह से चत रहा था। और बिच बिच मैन अपनि जीभ को उनकि चूत मे पुरी तरह अनदर दल कर अनदर बहर करने लगा। जब मेरि जीभ भुवजि कि भगनसुमन से तकरै तो भुवजि का बनध तुत गया और मेरे चेहेरे को अपनि जनघोन मे जकर कर उनहोने अपनि चूत को मेरे मुनह से चिपका दिया। कुच देर बद उनका पनि बहने लगा और मैं उनकि चूत कि दोनो फनकोन को अपनि मुनह मे दबा कर उनका अमरित-रस पिने लगा। मेरा लुनद फिर से लोहे कि रोद कि तरह सखत हो गया था। मैं उथ कर खरा हो गया और अपने लुनद को हथ से सहलते हुए भुवजि को पलनग पर सीधा लिता कर उनके उपर चदने लगा। उनहोने ने मुझे रोकते हुए कहा, "ऐसे नही मेरे रजा, चूत का मज़ा तुम चूस चूस के ले चुके हो आज मैं तुमहे दुसरे चेद का मज़ा दुनगी। मैने कहा भुवजि मेरि समझ मे कुच नही अया। भुवजि बोलि, "आज तुम अपने मोते तगदे लुमबे लौरे को मेरि गनद मे दलो," और उथ कर बैथ गयी। मेरे हथ हता कर दोनो हथोन से मेरा लुनद पकर लिया और सहलते हुए अपनि दोनो चुचीओन के बिच दबा-दबा कर लुनद के सुपरे को चुमने लगी। उनकि चुनची कि गरमहत पकर मेरा लौरा और भि जोश मे आकर जकद गया। मैं हैरन था। इतनी चोति सि गनद के चेद मे मेरा लुनद कैसे जयेगा। मैं बोला, "भुवजि इतना मोता लुनद तुमहरि गनद मे कैसे जयेगा "" भुवा बोलि, "हन मेरे रजा, गनद मे ही। पीचे से चोदना इतना असान नही है। तुमहे पुरा जोर लगना होगा।" इतना कह कर भुवजि धेर सरा थुक मेरे लुनद पर लगा दिया और पुरे लुनद कि मलीश करने लगी। "पर भुवजि गनद मे लुनद घुसने के लिये जयदा जोर कयोन लगना परेगा"" भुवा बोलि वो इसलिये रजा कि जब औरत गरम होती है तो उसकि चूत पनि चोरती है, जिस्से लौरा आने-जाने मे असनी होती है। पर गनद तो पनि नही चोरती इसिलिये घरशन जैदा होता है और लुनद को जैदा तकत लगनी परती है। गनद मरने वले को भि बहुत तकलीफ़ होती है। पर रजा मज़ा बहुत है मरवने वले को भि और मरने वले को भि आता है। इसिलिये गनद मरने के पहले पुरी तयरी करनी परती है।" मैने कहा "कया तयरी करनी परती है"" भुवजि मुसकुरा कर पलनग से उत्री और पने चुतर को लहरते हुए दरेस्सिनग तबले से वस्सेलिने कि शिशि उथा लयी।

धक्कन खोल कर धेर सरा वस्सलिने अपने हतोन मे ले ली और मेरे लौरे कि मलीश करने लगी। अब मेरा लौरा रोशनी मे चमकने लगा। फिर मुज़े दिब्बि दे दी और बोलि, "अब मैं झुकती हुन और तुम मेरे गनद मे थीकसे वस्सेलिनस लगा दो। और वो पलनग पर पेत के बल लेत गयी और अपने घुतनो के बल होकर अपने चुतर हवा मे उथा दिया। देखने लयक नज़रा था। भभि के गोल मतोल चुतर मेरि अनखोन के समने लहरा रहे थी। मुझसे रहा नही गया और झुक कर चुतर को मुनह मे भर कर कस कर कत लिया। भुवजि कि चीख निकल गयी। फिर मैने धेर सरा वसल्लिने लेकर उनकि गानद कि दरर मे लगा दिया। भुवा बोलि, "आरी मेरे भोले सैयन, उपर से लगने से नही होगा। उनगली से लेकर अनदर भि लगओ और अपनि उनगली पेल पेल कर पहले गानद के चेद को धिला करो।" मैने अपनि बिच वलि उनगली पर वसल्लिने लगा कर उनकि गनद मे घुसने कि कोशिश की। पहलि बर जब नही घुसी तो दुसरे हथ से चेद फैला कर दोबरा कोशिश कि तो मेरा उनगली थोरी सि उनगली घुस गयी। मैने थोरा बहर निकल कर फिर झतका दे कर दला तो घपक से पुरी उनगली धनस गयी। भुवजि ने एकदुम से अपने चुतर सिकोर लिया जिस्से कि उनगली फिर बहर निकल गयी।

भुवा बोलि "इस्सि तरह उनगली अनदर-बहर करते रहो कुच देर तक। मैं उनके कहे मुतबिक उनगली जलदी से अनदर-बहर करने लगा। मुझे इसमे बरा मज़ा आ रहा था। वो भि कमर हिला-हिला कर मज़ा ले रही थी। कुच देर बद भुवजि बोलि, "चलो रजा आ जओ मोरचे पर और मरो गनद अपनि भुवा कि।" मैं उथ कर घुतने का बल बैथ गया और लुनद को पकर कर भुवा कि गनद के चेद पर रख दिया। भुवजि ने थोरा पीचे होकर लुनद को निशने पर रखा। फिर मैने उनकि चुतर को दोनो हथोन से पकर कर धक्का लगया। भुवजि कि गनद कि चेद बहुत तिघत था। मैं बोला, "भुवजि मेरा लुनद आप कि गन मेन नही घुस रहा है।" भुवजि ने तब अपने दोनो हथोन अपने चुतर को खिनच कर गनद कि चेद को पैला दिअय और दोबरा जोर लगने को कहा। इसबर मैने थोर और जोर लगया और मेरा सुपरा उनकि गनद कि चेद मे चला गया। भुवजि कि कसि गनद ने मेरे सुपरे को जकद लिया। मुझे बरा मज़ा आया। मैने दोबरा धक्का दिया तो उनकि गनद को चिरता हुअ मेरा अधा लुनद भुवजि कि गनद मे दखिल हो गया। भुवजि जोर से चीख उथी, "उईइ मा, दुखता है मेरे रजा।" पर मैने उनकि चीख पर कोइ धयन नही दिया और लुनद थोर पीचे खीनच कर जोरदर शोत लगया। मेरा 9" का लौरा उनकि गनद को चिरता हुअ पुरा का पुरा अनदर दखिल हो गया। भुवजि फिर चीख उथी। वो बर बर अपनि कमर को हिला हिला कर मेरे लुनद को बहर निकलने कि कोशिश कर रही थी। मैने आगे को झुक कर उनकि चुनची को पकर लिया और उनहे सहलने लगा। लुनद अभि भि पुरा का पुरा उनक्कि गनद के अनदर था। कुच देर बद भुवजि कि गनद मे लुनद दले दले उनकी चुनची को सहलता रहा।

जब भुवजि कुच नोरमल हुए तो अपने चुतर हिला कर बोले, "चलो रजा अब तीख है।" उनका सिगनल पकर मैने दोबरा सीधे होकर उनकि चुतर पकर कर धिरे-धिरे कमर हिला कर लुनद अनदर-बहर करना शुरु कर दिया। भुवजि कि गनद बहुत हि तिघत थी। इसे चोदने मे बरा मज़ा आ रहा था। अब भुवा भि अपना दरद भूल कर सिसकरी भरते हुए मज़ा लेने लगी। उनहोने अपनि एक उनगली अपनि चूत मे दल कर कमर हिलना शुरु कर दिया। भुवजि कि मसती देख कर मैं भि जोश मे अ गया और धिरे-धिरे अपनि रफ़तर बरह दी। मेरा लुनद अब पुरी तेज़ी से उनकि गनद मे अनदर-बहर हो रहा था। भुवजि भि पुरी तेज़ी से कमर आगे पीचे करके मेरे लुनद का मज़ा ले रही थी। लुनद ऐएसे अनदर-बहर हो रहा था मनो एनगिने का पिसतोन। पुरी कमरे मे चुदै का थप थप कि अवज गुनज रही थी। जब भुवजि के थिरकते हुए चुतर से मेरि जनघे तकरती थी तो लगता कोइ तबलची तबले पर थप दे रहा हो। भुवजि पुरी जोश मे पुरी तेज़ी से चूत मे उनगली अनदर-बहर करती हुई सिसकरी भर रही थी। हुम दोनो हि पसीने पसीने हो गयी थे पर कोइ भि रुकने का नम नही ले रहा था। भुवजि मुझे बर बर ललकर रही थी, "चोद लो मेरे रजा चोद लो अपनि भुवा कि गनद। आज फद दलो इस्से। शबश मेरे शेर, और जोर से रज्जजा और जोर से।

फद दली तुमने मेरि तो।" मैं भि हुमच हुमच कर शोत लगा रहा था। पुरा का पुरा लुनद बहर कीनच कर झतके से अनदर दलता तो उनकि चीख निकल जती। मेरा लवा अब निकलने वला था। उधेर भुवा भि उनगलि से चुत को चोद चोद कर अपनि मनज़िल के पस थी। तभि मैने एक झतके से लुनद निकला और उनकि चूत मे जर तक धनस दिया। भुवजि इसके लिये तैर नही थी, इस्सिलिये उनकि उनगली भि चूत मे हि रहा गयी थी जिस्से उनकि चूत तिघत लग रहा था। मैं भुवजि के बदन को पुरी तरह अपनि बहोन मे समेत कर दनदन शोत लगने लगा। वो भि समहल कर जोर जोर से अह्हह उह्हह्ह करती हुई चुतर आगे-पीचे करके अपनि चूत मे मेरा लुनद लेने लगी। हुम दोनो कि सनस फुल रही थी। अकिर मेरा जवलमुखि फ़ुत परा और मैं भभि कि पीथ से चिपक कर भुवा कि चूत मे झर गया। उनकि भि चूत को झरने को था और भुवजि भि चीखती हुई झर गयी। हुम दोनो उसि तरह से चिपके हुए पलनग पर लेत गयी और थकन कि वजह से सो गये।

उस रत मैने भभि कि चूत कम से कम चर बर और चोदा।

सुबहा करिब 10 बजे सुमन (दोसत कि बहन) ने मुझे उथा कर चै दी और कहा दिनु भैया फ़रेश हो कर नहा धो लो मैन नसता बनति हुन। घर मेन केवल उसे देख कर कहा मा और भुवजि कहन गये " वो बोलि वे तो कब के खेत चले गये हैन। यहन अवज होगि इसलिये मा रात कि नीद खेत मेन हे पुरि करेगि और वे लोग शम से पहले लोतने वले नहिन हैन। और मैन फ़रेश होकर नहा धो कर नसता करने लगा। सुमन अपने कम मेन लग गयी। मैन कमरे मेन अकर कितब परने लगा। मुज़े कहिन बहर जना नहिन था इसलिये मैन केवल तौलिअ और बनियन मेन था।

करिब एक घनते बद सुमन अपना कम निबता कर कमरे मेन बिसतेर थीक कर आयी और मुज़से बोलि भैया आप उदर खुरसि पर बैथ जओ मुज़े बिसतर थीक करना हैन। मैन उथ कर कुरशि पर बैथ गया वो बिसतर थिक करने लगि।

चदर पर परे मेरे लुनद और भुवजि कि चूत के पनि के धब्बे रत कि कहनि सुना रही है। सुमन झुक कर निशन वलि जगह को सुनघ रही थी। मेरि तो उपर कि सनस उपर और नीचे कि सनस नीचे रहा गयी। थोदि देर बद सुमन उथ गयी और मेरि तरफ़ देखती हुइ अदा से मुसकुरा दी। फिर इथलते हुए मेरे पस आई और अनख मर कर बोले, "लगता है रत भुवजि के साद जम कर खेल खेला हैन।" मैं हिम्मत कर के बोला, "कया मतलब"" वो मुझसे सत-ती हुइ बोलि, "इतने भोले मत बनो। जनभुजकर अनजन बनरहे हो। कया मैन अछि नहिन लगति तुमे" मैन कुछ नहिन कहा और केवल मुसकरा दिया और मैने गौरसे देखा उसको। मसत लौनदिअ थी। सवमली से रनग, चरहरा बदन। उथि हुइ मसत चुनचेअन। उसने अपना पल्लो समने से लेकर कमर मे दबया हुअ था, जिस्से उसकि चुनची और उभर कर समने आ गयी थी। वो बत करते करते मुझसे एक दम सत गयी और उसकि तनि तनि चुनची मेरि ननगि चती से चुने लगा।

येह सब देख कर मेरा लुनद जोश मे फ़रफ़रा उथा। मैने सोचा कि इस्से जयदा अस्सह्हा मौका फिर नही मिलने वला। सलि खुद हि तो मेरे आई हुइ है। मैने हिम्मत कर के उसे कमर से पकर लिया और अपनि पस कीनच कर अपने से चिपका लिया और बोला, "चल सुमन थोदा सा खेल तेरे सथ भि हो गये, वो एकदुम से घबरा गयी और अपने को चुरने कि कोशिश करने लगी। पर मैं उसे कस कर पकरे हुए चुमने कि कोशिश करने लगा। वो मुझ से दुर हतने कि कोशिश करती जरहि थि पर वो बेबस थी। इसि दौरन मेरा तौलिअ खुल गया और मेरा 9" का फ़नफ़नता हुअ लुअरा अज़द हो गया। मैन कहा देखो मजे लेना हैन तो चलो बिसतर पर और उसे अपने बहोन मेन उथा कर बिसतेर पर लिता कर अपना लुनद उसकि गनद मे दबते हुए मैने अपनि एक तनग उसकि तनग पर चरा दिया और उसे दबोच लिया।

दोनो हथोन से चुनचेओन को पकर कर मसलते हुए बोला, "नखरे कयोन दिखती है" खुदा ने हुसन दिया है कया मर हि दलोगी, आरे हुमे नही दोगी तो कया अचर दलोगी" चल आजा और पयर से अपनि मसत जवनि का का मज़ा लेते हैन।" कहते हुए उसके बलौसे को खीनच कर खोल दिया। फिर एक हथ को नीचे ले जकर उसके पेत्तिसोअत के अनदर घुसा दिया और उसकि चिकनि चिकनि जनघो को सहलने लगा। धिरा धिरा हथ उसकि चूत पर ले गया। पर वो तो दोनो जनघोन को कस कर दबै हुए थी। मैं उसकि चूत को उपर से कस कस कर मसलने लगा और उनगली को किसि तरह चूत के अनदर दल दिया। उनगली अनदर होते हि वो कस कर चतपतै और बहर निकलने के लिये कमर हिलने लगी। इस्से उसका पेत्तिसोअत उपर उथ गया। मैने कमर पीचे कर के अपने लुनद को ननगे चुतर कि दरर मे लगा दिया। कया फुले फुले चुतर था। अपना दुसरा हथ भि उसकि चुनची पर से हता कर उसके चुतर को पकर लिया और अपना लुनद से उसकि गनद कि दरर मे रख कर उसकि चूत को मैं उनगली से चोदते हुए गनद कि दरर मे लुनद थोदा थोदा धनस रहा था। कुच हि देर मे वो धिलि पर गयी और जनघोन को धिला कर के कमर हिला हिला कर आगे और पीचे कि चुदै का मज़ा लेने लगी। "कयोन रनि मज़ा आ रहा है"" मैने धक्का लगते हुए पुचा। "हन भैयन मज़ा आ रहा।" उसने जनघे फ़ैला दी जिस्से कि कि मेरि उनगली असनि से उदेर-बहर होने लगी। फिर उसने अपना हथ पीचे करके मेरे लुनद को पकर लिया और उसकि मोतै को नप कर बोले, "है इतना मोता लुनद। चलो मुझे सिधा होने दो," कहते हुए वो चित लेत गयी।

अब हुम दोम अगल बगल लेते हुए थे। मैने अपनि तनग उसकि तनग पर चरा लिया और लुनद को उसकि जनघ पर रगते हुए चुनचीओन को चुसने कगा। पथर जैसा सखत थी उसकि चुनची। एक हथ से उसकि चुनची मसल रहा था और दुसरे हथ कि उनगली से उसकि चूत चोद रहा था। वो भि लगतर मेरे लुनद को पकर कर अपनि जनघोन पर घिस रजी थी। जब हुम दोनो पुरि जोश मे आगये तब सुमन बोलि, "अब मत तरपओ भैया चोद दो मुझे अब।"मैने झतपत उसकि सरी और पेत्तिसोअत को कमर से उपर उथा कर उसकि चूत को पुरा ननगा कर दिया।

वो बोलि, "पहले मेरे सरे कपरे तो उतरो।" मैं बोला, "नही तुझे अध ननगी देख कर जोश और दौबले हो गया है, इस्सिलिये पहेलि चुदै तो कपरो के सथ होगी।" फिर मैने उसकि तनगे अपनि कनधोन पर रखी और उसने मेरा लुनद पकर कर अपनि चूत के मुनह पर रख लिया और बोले, "आऊ , शुरु हो जओ।" मैने कमर आगे कर के जोर दर धक्का दिया और मेरा अधा लुनद दनदनता हुअ उसकि चूत मे धनस गया। वो चिला उथि। "अहिसते भैया अहिसते दरद हो रहा हैन और उसने अपनि चुत को सिकोद ली जिस से मेरा लुनद उसकि चूत से बहर निकल आया। मैने उसकि सखत चुनची को पकर कर मसलते हुए फ़िर अपना लुनद उसकि चुत पर रख कर एक और शोत लगया तो मेरा सुपदा उसकि चुत मैन घुस गया कुच देर तक मैने कुछ हरकत नहिन कि और उसके होतोन को अपने होतोन मेन लेकर चुसने लगा। उसकि आनखोन से अब भि आनसु निकल रहे थे थोदि देर बद वो थोदा सनत हुयी और अब मैन दुसरा शोत लगया तो मेरा बचा हुअ लौरा भि जर तक उसकि चूत मे धनस गया। मरे दरद के उसकि चिख निकल गयी और बोले, "बरा जलिम है तुमहरा लौरा। किसि कुनवरि चोकरी को इसतरह चोदोगे तो वो मर जयेगी। समभल कर चोदना।"मैं उसकि चुनचेओन को पकर कर मसलते हुए धिरे-धिरे लुनद चूत के अनदर-बहर करने लगा। चूत तो इसकि भि तिघत।

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