> दो बहनो के साथ चुपाचिपि Do Bahano Ke Sath Chupachipi

दो बहनो के साथ चुपाचिपि Do Bahano Ke Sath Chupachipi

Posted on Thursday, 4 October 2012 | No Comments



ये बात तबकि है जब मे 10थ मे था। अपरिल का महिना था सभि सचूल मे चुत्ति सुरु हो गयि थि। मे हर साल चुत्ति मनने अपने ममा (उनसले) के घर जता था। इस बार भि मे उनके घर चुत्ति मनने चला गया। मे आपको बता देअ हु कि मेरे उनसले बहुत साल पेहले हि देअद हो गये थे। अब उनके घर मे मेरि ममि उनकि बदि लदकि मनिशा उस से चोति लदकि जगरुति और उस से चोता लदका मनोज रेहते है।तब मनिशा 16 जगरुति 13 और मनोज 12 साल का था।

मेरि ममि एक सोमपनी मे सलरक है। वो पुरे दिन घर पर नहि होति है। मे ,
मनोज , जगरुति और मनिशा पुरे दिन बहुत खेलते है और रात को सब फ़लूर पे साथ मे हि सो जते थे और ममि एक अलग बेदरूम मे सोति थि। एक दिन मेने और मेरे दोसत ने उसके घर पर एक बलुए फ़िलम देखि। मे पेहलि बार बलुए फ़िलम देख रहा था मे बहुत एक्ससिते हो गया। उसदिन हर वकत मेरे दिमग मे वो हि फ़िलम दिख रहि थि। मुजे भि सेक्स करने का बहुत मन्न कर रहा था।

उस रात को जब सब सो गये लेकिन मुजे निनद नहि आ रहि थि ?(यौ कनोव थत) मनिशा मेरे पस्स मे हि सोयि थि । मेने देखा कि वो पुरि तरह से सो गयि हे तब मेने हलके से उसकि कमर पर हथ रख दिया फिर धिरे धिरे मेने अपने हाथ को उपर लेजकर उसके अप्पले सिज़े बूबस पर रख दिया और धिरे से दबया इतने मे हि वो जाग गयि ।मेने अपना हाथ उसके बूबस पर हि रहने दिया और ऐसे बेहवे किया कि मे सच मुच मे सो रहा हु। फिर उसने मेरे हाथ को हतकर सिदे मे रख दिया। दूसरे दिन वो मुजे अजीब नज़र से देख रहि थि लेकिन मे बिलकुल नोरमली बेहवे कर रहा था।

उस दिन ममि के ओफ़्फ़िसे जने के बाद हम सब दोपहर को चुपचुपि (अ गमे) खेलने लगे। पेहला तुरन मनोज का आया । उसने 100 तक गिना और हुम तीनो चुप गये। मनिशा बेदरूम मे , जगरुति दूर के पिचे और मे बथरूम मे चुप गया। थोदि देर के बाद जगरुति औत हो गयि। उसके बाद मनोज मुजे धूधने के लिये बथरूम कि और आअ रहा था इस लिये मे वहा से निकल कर बेसरूम मे मनिशा के पस्स भग गया। मनिशा ने मुजे कहा कि तुम इधेर कयौ आये हुम दोनो औत हो जयेगे मेने उसे कहा कि कुच नहि होगा। थोदि देर मे मनोज बेदरूम कि और आने लगा तब हुम दोनो बेदरूम के पलनग के पिचे बेथे थे। जब उसने बेदरूम का दूर खोला तो मेने मनिशा को पलग के सिदे मे लेतकर उसके उपर सो गया। फिर मनोज को हुम दिखै नहि दिये इसलिये वो वहसे चला गया। फिर मेने मनिशा के लिपस पर अपने लिपस रखा कर उसे 2-3 मिनुते तक किस्स कर दि।थत’स मी फ़िरसत किस्स तो अनी लदी वहत अ अमज़िनग फ़ीलिनग थत वस। वो कुच नहि बोलि। फिर मनोज आ जयेगा ये सोचकर हुम औत हो गये।

फिर दव (तुरन) मेरा आया। लेकिन मे उनको 2-3 बार औत नहि कर पाया। अब 4:00 बज चुके थे मे और मनोज हर साम 4 बजे सरिसकेत खेलने के लिये उसके फ़रिएनद के घर पर जाते थे। फिर हुम खेलने के लिये चले गये। रात को जब हम तव देख रहे थे तो मनिशा मुजे समिले दे रहि थि मे समज गया कि वो भि करना चहति है। उस रात को जब सब सो गये तो करीब 11:30 बजे मेने मनिशा को देखा तो वो अभि तक सोयि नहि थि। मे
रात को सिरफ़ बरमुदा पेहेनता था (नो उनदेरवेअर) मेने अपना बरमुदा अपनि कमर से निचे उतर दिया और मनिशा का हात पकद कर अपने लुनद पर रख दिया और मुथ मरने को कहा । मेने भि अपना हाथ उसके लेहनगे मे दालकर उसकि चुत मे अपनि उनगलि दालकर अनदेर बहर करने लगा। 5-6 मिनुते के बाद उसकि चुत एकदुम गिलि हो गयि और मेरा कुम भि निकल आया। फिर हुम थोदि देर किस्स करके सो गये।

दूसरे दिन मेने मनिशा को पुरि तरह से चोदने के लिये एक पलन बनया। जब उनहोने मुजे चुपचुपि खेलने के लिये कहा तो मेने बहना बनया कि मुजे पेर मे दरद है। इस लिये हुम दोपहर कोकरीब 2 बजे सब सो गये। मे, मनोज और जगरुति हल्ल मे जबकि मनिशा बेदरूम पे सो गयि। उसे सयद मेरे पलन का पता चल गया था। 3:50 के आसपस मनोज उथ गया और फ़रेश होकर सरिसकेत खेलने के लिये चला गया। जगरुति अभि भि गहरि निनद मे थि। मे धिरे से उथकर बेदरूम कि और जने लगा। मे उस वकत बहुत एक्ससिते था। मेने हलके से दूर खोला और देखा कि मनिशा सो रहि है फिर मेने दूर अनदर से लोसक कर दिया और घूम कर देहा तो मनिशा मुसकुरा रहि थि। वोव। मे उसके पस गया और कहा कि आज हुम आरम से करते हे। उसने सिर हिलकर हा का सिगन दिया। इ’म तू एक्ससिते। ओह्हह।

मेने उसे खदे रेहने के लिये कहा और उसके पुरे कपदे निकल दिये वो मेरे सामने पुरि तरह ननगि थि। मेरा लुनद पेनत के अनदर हि तिघत हो गया। फिर उसने भि मेरे पुरे कपदे निकल दिये अब हुम दोनो पुरि तरह ननगे थे। उसके बूबस चोते अप्पले जैसे और सिलकि थे। और उसका फ़िगुरे थोदा मोता लेकिन एकदुम राबचिक था। हुम दोनो अभि तक विरगिन थे। फिर मेने उसे बेद पर लेता दिया और उसके उपर सो कर उसे किस्स करने लगा तभि उसने मेरे 4’8 इनच के लुनद को पकद कर उसकि चुत मे रख दिया। मेरे एक हि जतके मे अपना पुरा लुनद उसकि चुत मे घुसा दिया। शे वस मोअनिनग अह्हह्हह्हह्हह्हह्ह ओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हु ऊउह्हह्हह्हह्हह्हह।।

7-8 मिनुते तक ऐसा करने के बाद मे निचे और वो मेरे उपर सो गयि और किस्स करते हुए थोदि देर उसकि चुत मारता रहा। अब मुजे उसकि गानद मरने का मन्न हुअ। मेने उसे बेद पर उलता लेता दिया और उसे अपनि गानद के होले को खोलने को कहा फिर मे उसमे अपना लुनद दलने लगा। मेरा लुनद जैसे तैसे थोदा उसकि अनस मे गया लेकिन हुम दोनो को बहुत दरद होने लगा। फिर मेने हैर ओइल लेकर उसकि अनस मे लगया और अपने लुनद पर भि। फिर धिरे धिरे मेने पुरा लुनद उसकि अनस मे दाल दिया। फिर उसे उप-दोवन करने लगा मनिशा अब बहुत ज़ोर से ऊऊह्हह्हह्हह्ह ।।आह्हह्हह्हह्हह्हह्ह… कर रहि थि। इतने मे हि दूर के पस्स से कुच आवज़ सुनै दि मे जलदि से दूर के पस्स जकर केयहोले मेसे बहर देखा।

ओह मी गोद्दद बहर जगरुति थि मे बहुत दर गया। मनिशा ने मुजे पुचा कि कोइ था कया तब मेने उसे कहा कि कोइ नहि था। मेने उस्से कहा कि अब बस कल करेगे जगरुति उथ जयेगि। फिर मे वहसे चला गया मनिशा बेदरूम मे हि सोयि रहि।मे हल्ल मे गया तो देखा कि जगरुति आनखेन बनद करके सो रहि थि। आधे घनते के बाद वो उथ गयि वो मुजे अजीब तरह से देख रहि थि मेने उसे कुच नहि कहा। मे दर रहा था कि सायद वो ममि को सब बता देगि। लेकिन उसने ममि को कुच नहि बतया।फिर उस रात को मे जलदि हि सो गया।

दूसरे दिन फिर हुम सब दोपहर को चुपचुपि खेलने लगे। पेहला तुरन मेरा आया मेने जलदि से मनोज को औत कर दिया। फिर तुरन मनोज का आया और हुम तीनो चुप गये। मेने जगरुति को बथरूम मे चुपते देका लिया था। इसके बाद कया हुअ ये मे आपको अगले परत मे बतौनगा। बयीईईईईई।।बयीईईई। इ हद मनी सेक्स एनसौनतेर विथ मनयमोरे गिरलस । Any babe aur guys want to know about my more sex encounters mail me at ankiit99@yahoo.com .

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