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मोहिनी का कमर दर्द-3 - Mohini Ka Kamar Dard 3

Posted on Friday, 26 October 2012 | No Comments


मोहिनी का कमर दर्द-3
प्रेषक : प्रथम

करीब बीस मिनट तक एक दूसरे के गुप्तांगों को चूसने के बाद एकदम से उसका पूरा बदन अकड़ने से लगा और वो बोली कि अब वो झरने वाली है तो मैंने उसे कहा- जान आ जाओ ! मैं भी बस झड़ने ही वाला हूँ...

कह कर हम दोनों ने एक साथ एक दूसरे के मुँह को अपने अपने रज से भर दिया...

फिर शुरू हुआ वीर्य को चाटने का काम... करीब दस मिनट लगे हमें एक दूसरे के वीर्य को चाट कर साफ करने में...

अब जाकर इस लण्ड को थोड़ी संतुष्टि हुई...

वो उठी और अपनी बड़ी गाण्ड को मटकाते हुए रसोई की तरफ जाने लगी।

मैंने पूछा- क्या हुआ? कहाँ जा रही हो मेरी जान...?

तो वो बोली- डार्लिंग, काफ़ी देर से मस्ती मार रहे हैं, कुछ खा लेते हैं...

वो अंदर से बीयर की दो बोतलें ले आई और हमने बिस्तर पर बैठे बैठे ही बोतल खोली...

तभी उसे जाने क्या सूझी, वो बोली- जानू, प्लीज़ लेट जाओ ना...

मैं जैसे ही लेटा उसने बीयर मेरे पूरे शरीर पर गिरानी शुरु कर दी... मेरे लण्ड, मेरे मुँह, मेरे सारे शरीर पर बीयर ही बीयर !

फिर उसने मेरे शरीर को चाटना शुरू किया। उसने शुरुआत मेरे चेहरे से की और धीरे धीरे वो मेरी जाँघों पर बैठ गई और मेरे दूध चूसने लगी। वो बोली- मैंने कब से सोचा था कि ऐसे बीयर पियूँगी किसी दिन मगर आज तक ऐसा कोई नहीं मिला जिसका दिमाग मेरे जैसे अचलता हो... आई लव यू डार्लिंग...

और फिर उसने अपने ऊपर उड़ेल ली बीयर !

उसके चेहरे से बहते हुए उसके दूध पर से होकर टपक रही थी मेरे शरीर पर...

फिर मैंने उसे बिठाया और उसने मेरी कमर में अपनी टाँगें लपेट ली और उसकी चूत मेरे लण्ड से टकरा गई और फिर मैं उसके दूध और उसके चुचूकों से टपकती बीयर की बूँदों को पीने लगा जिससे वो फिर से गर्म होने लगी और वो अपनी चूत को मेरे लण्ड की तरफ धकेलने लग गई...

फिर मैं अपनी उंगलियों में उसके चुचूकों को मसलने लगा और अपने होंठों से उसके दूध से टपकते हुई बीयर को पीने लगा। थोड़ी देर में जोश बढ़ा तो मैंने उसके दूध मसलने लगा और वो भी बोलने लग गई- प्लीज़ जान ! और ज़ोर से दबाओ इन्हें ... देखो ना कितना तड़पे हैं तुम्हारे लिए... मसलो इन्हें... इन मादरचोदों ने तुम्हारे लिए बहुत तड़पाया है मुझे... माँ चोद दो इनकी...

फिर मैं अपनी उंगलियों में उसके दोनों चुचूकों को ज़ोर से दबा दबा कर मसल रहा था और अपने होंठ उसके होंठो में भिड़ा कर अपनी जीभ से उसकी जीभ को चाट रहा था।

...और नीचे से उसकी चूत और मेरा लण्ड आपस में छटपटा रहे थे एक दूसरे में समा जाने के लिए...

तभी मैंने अपने दोनों हाथों को उसकी गाण्ड के नीचे ले जाकर उसे उठाया और उसने मेरे लण्ड को अपनी चूत पर टिकाया और एक हल्के से झटके में मेरा लण्ड उसकी चूत की गहराइयों में समा गया...

उसकी एकदम से चीख निकली- आ आआआअहह ह्म्म्म्म मममम्मूऊऊऊऊ ओह आऐईयईईई !

और ज़ोर से उसने अपने पूरे शरीर का भार मेरे लण्ड पर छोड़ दिया...

फिर धीरे धीरे वो मेरे लण्ड पर उचकने लगी...

मैं लेट गया और वो मेरे ऊपर बैठ कर अपनी चूत को मेरे लण्ड पर पटक रही थी...

उसके दोनों दूध ऊपर नीचे झटके खा रहे थे... और मैं उसकी गाण्ड को एक हाथ से सहलाते हुए एक हाथ से उसकी दूध को मसल रहा था...

पूरे कमरे में फचाक फचक की आवाज़ आ रही थी...और साथ में हम दोनों की सिसकारियों की भी... उूउउम्म्म आआ अहह...उूइई ईईई मर गई...इतना बड़ा लण्ड... तुम कहाँ थे मेरे दामाद जी... अयाया... चोद दो अपनी बीवी की माँ को आज... अपनी बीवी की माँ चोद दो... छोड़ना मत साली को... आअज तो मैं तेरी राण्ड हूँ... जो करना है कर ले... आआअहह... ऊऊऊहह... हमम्ममम...

तभी मैंने उसे एक तरफ़ पटक दिया और उसने अपनी दोनों टांगें हवा में ऊपर उठा दी... और मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर रख कर दबा दिया...

और फिर से मेरा लण्ड उसकी चूत की गहराइयों की सैर करने लगा...पूरा कमरा फच फच की आवाज़ों और हम दोनों की सिसकारियों से गूंज रहा था... आअहह... ऊऊओह... मोहिनिई आ जा मेरी राण्ड... छिनाल साली... इतने दिनों से तुझे चोदने की सोच रहा हूँ आज पकड़ में आई है...आअहह...

तभी उसके शरीर में अकड़न आ गई... और वो अपनी चूत को मेरे लण्ड पर दबाने लग गई...

मैं समझ गया कि यह झड़ रही है... वो एकाएक झाड़ गई... मगर मेरा लण्ड तो अभी भी पूरे शवाब पर था तो मैं धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था...

मगर वो बोली- प्लीज़ दामाद जी... रुक जाइए !

तो मैंने कहा- अभी मेरा तो हुआ ही नहीं है...

तो वो बोली- आप चाहो तो गाण्ड में डाल लो या थोड़ी देर इंतज़ार कर लो... अब इस उमर में इतनी मेहनत नहीं होती मुझसे...

तो मैंने कहा- ठीक है...

मैंने अपना लण्ड निकाला बाहर और देखा तो उसकी चूत तो फैल कर भोंसड़ा बन गई थी...

तभी वो बिना कहे उल्टी होकर कुतिया बन गई और अपने दोनों हाथों से उसने अपनी गाण्ड को फैला कर मेरे सामने परोस दी...

हाय.... उसकी गाण्ड के भूरे से छेद ने तो मेरा दिल ले लिया...

फिर मैंने तो पहले उसे अपने होंठो से कस कर पप्पी की... और अपनी जीभ उसकी गाण्ड में डाल दी...

फिर वो और मैं मेहनत करने लगे उसकी गाण्ड को फैलाने में...

वो बोली- तेल लगा लो !

मगर मैंने कहा- जब तक दर्द ना हो तब तक क्या मज़ा आएगा सील तोड़ने में...?

वो बोली- लगता है आज तुम मार ही डालोगे मुझे...

मैंने कहा- अगर ऐसे गाण्ड की सील तोड़ने में औरतें मरती तो आज दुनिया में औरतों की तादाद आधी हो गई होती...

कह कर मैंने अपने मुँह को उसकी गाण्ड पर लगा दिया...और उसे चाटने लगा... उसका भी स्वाद एक अलग ही था...

वो अपने हाथों को अपने चूत और टाँगों के बीच से निकाल कर मेरे लण्ड को पकड़ रही थी...और उसे झटके दे रही थी... मैं उसकी गाण्ड चाट रहा था और अपने दोनों हाथों से उसकी गाण्ड को जितना हो सके फैला रहा था...

और उसकी गाण्ड जब मेरी थूक और लार से भर गई तो फिर मैंने पीछे से उसके दोनों दूधों को पकड़ लिया और अपने लण्ड को उसकी गाण्ड के छेद पर टिकाया और एक ज़ोर से झटका लगाया... तो वो लगभग गिर ही पड़ी थी बिस्तर पर...

मगर कैसे भी करके उसने अपने आप को संभाला...

मेरा लण्ड का सुपारा अभी उसकी गाण्ड में घुस तो गया था मगर सेट नहीं हो पाया था तो मैंने उसके दूध छोड़ कर उसकी गाण्ड को फैला दिया जितना हो सका उतना...

और अपने सुपारे को सेट कर दिया उसकी गाण्ड के छेद पर... और वो नीचे से कराह रही थी, हाँफ रही थी...

उसके पूरे शरीर पर पसीने की बूंदें आ गई थी जो मोतियों सी चमक रही थी... और जिसे मैं चाट चाट कर साफ कर रहा था...

तभी मैंने थोड़ा सा और थूका उसकी गाण्ड के छेद पर... जिसे मैं धीरे धीरे रगड़ते हुए उसकी गाण्ड में घुसाने लगा...अब उसे शायद थोड़ा आराम आ रहा था तो वो भी अपनी गाण्ड को पीछे सरकाते हुए मेरा साथ देने लग गई और अपने चूत के नीचे से हाथ निकाल कर उसने मेरी गाण्ड को अपनी ओर दबाने लगी और एक हाथ से वो खुद ही अपने दूध मसलने लग गई...

फिर धीरे-धीरे धकेलते हुए मैंने अपना पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में डाल दिया...

उसे थोड़ी परेशानी हो रही थी मगर सहन कर रही थी क्योंकि परेशानी के साथ साथ उसे मज़ा बहुत आ रहा था...

फिर वो अपने हाथों से अपने चूत को मसलने लगी और बोली- हाँ जान, अब शुरू हो जाओ... जितनी बेरहमी करनी हो कर दो आज... आज तो अगर जान भी चली जाए तो गम नहीं...

मेरे धक्कों की गति बढ़ती गई... बढ़ती गई... और करीब बीस मिनट तक उसकी गाण्ड चोदने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं झरने वाला हूँ तो वो बोली- इस मादरचोद गाण्ड को भी तो स्वाद लेने दो... अंदर ही झड़ जाना जानू...

और 10-15 धक्कों के बाद अचानक से मैं उसके दूध को ज़ोर से मसलने लगा... मेरा सारा शरीर अकड़ने लगा... ऐसा लगा कि मेरे शरीर का सारा खून मेरे लण्ड में जा रहा है और बाहर आने को है...

और आख़िर उसकी गाण्ड में मैंने अपने वीर्य को गिरा दिया जो उसकी गाण्ड में पूरी तरह से भर गया था और बाहर बह रहा था जिसे वो अपने उंगलियों से निकाल निकाल कर चाट रही थी...

अब हम दोनों के चेहरे पर एक संतुष्टि थी...

वो बोली- चलो अब नहाते हैं...

और फिर मैंने उसे अपनी गोदी में उठाया, उसे उठा कर बाथरूम में ले गया जहाँ हम दोनों ने नहाते नहाते एक बार और चूत और लण्ड का खेल खेला। उसकी कहानी आपकी राय मिलने के बाद !

आपका प्यारा प्रथम

mausam.itsme@gmail.com

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