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प्यारी भाभी-1 - Pyari Bhabhi 2

Posted on Thursday, 4 October 2012 | No Comments

मेरा नाम रामु है। मैन सोल्लेगे मेन परहता हुन। मेरि उमरा अब बीस साल है। मैन एक साल से अपने भैया और भभि के साथ रह रहा हुन। भैया एक बरि सोमपनी मेन कम करते हैन। मेरि भभि कनचन बहुत हि सुनदेर है। भैया कि शादि को दो साल हो चुके हैन। भभि कि उमरा 24 साल है। मैन भभि कि बहुत इज़्ज़त करता हुन और वोह भि मेझे बहुत चहति है। हुम दोनो मेन खूब दोसति है और हनसि मज़क चलता रहता है। भभि परहै मेन भि मेरि सहयता करति है। वोह मुझे मथस परहति है।

एक दिन कि बात है। भभि मुझे परहा रहि थि और भैया अपने कमरे मेन लेते हुए थे। रात के दस बजे थे। इतने मेन भैया कि अवज़ आइ " कनचन, और कितनि देर है जलदि आओ ना"। भभि अधे मेन से उथते हुए बोलि " रमु बकि कल करेनगे तुमहरे भैया आज कुस्सह जदा हि उतवले हो रहे हैन।" यह कह कर वोह जलदि से अपने कमरे मेन चलि गयि। मुझे भभि कि बात कुस्सह थीक से समझ नहि आइ। कफ़ि देर तक सोचता रहा, फिर अचनक हि दिमग कि तुबे लिघत जलि और मेरि समझ मेन आ गया कि भैया को किस बात कि उतवलि हो रहि थि। मेरे दिल कि धकन तेज़ हो गयि। आज तक मेरे दिल मेन भभि को ले कर बुरे विचर नहि अये थे, लेकिन भभि के मुनह से उतवले वलि बात सुन कर कुस्सह अजीब सा लग रहा था। मुझे लगा कि भभि के मुनह से अनयस हि येह निकल गया होगा। जैसे हि भभि के कमरे कि लिघत बुनद हुइ मेरे दिल कि धकन और तेज़ हो गयि। मैने जलदि से अपने कमरे कि लिघत भि बुनद कर दि और चुपके से भभि के कमरे के दरवज़े से कान लगा कर खरा हो गया। उनदेर से फुसफुसने कि अवज़ आ रहि थि पर कुस्सह कुस्सह हि साफ़ सुनै दे रहा था।

" कयोन जि आज इतने उतवले कयोन हो रहे हो?"

" मेरि जान कितने दिन से तुमने दि नहि। इतना जुलम तो ना किया करो।"

"चलिये भि,मैने कब रोका है, आप हि को फुरसत नहि मिलति। रमु का कल एक्सम है उसे परहना ज़रूरि था।"

" अब सरिमति जि कि इज़ज़त हो तो अपकि चूत का उदघतन करुन।"

" है रम! कैसि बतेन बोलते हो।शरम नहि आति"

" शरम कि कया बात है। अब तो शादि को दो साल हो चुके हैन, फिर अपनि हि बिबि को चोदने मेन शरम कैसि"

" बरे खरब हो। अह।।आअ।।अह है रम…।औइ माअ……आआह…… धीरे करो रजा अभि तो सरि रात बकि है"

मैन दरवज़े पर और ना खरा रह सका। पसीने से मेरे कपरे भीग चुके थे। मेरा लुनद उनदेरवेअर फर कर बहर आने को तयर था। मैन जलदि से अपने बिसतेर पर लैत गया पर सरि रत भभि के बरे मेन सोचता रहा। एक पल भि ना सो सका।ज़िनदगि मेन पहलि बर भभि के बरे मेन सोच कर मेरा लुनद

खरा हुअ था। सुबह भैया ओफ़्फ़िसे चले गये। मैन भभि से नज़रेन नहि मिला पा रहा था जबकि भभि मेरि कल रात कि करतूत से बेखबर थि। भभि कितचेन मेन कम कर रहि थि। मैन भि कितचेन मेन खरा हो गया। ज़िनदगि मेन पहलि बर मैने भभि के जिसम को गौर से देखा। गोरा भरा हुअ गदरया सा बदन,लुमबे घने कले बाल जो भभि के घुतने तक लतकते थे, बरि बरि अनखेन, गोल गोल आम के अकर कि चुचिअन जिनका सिज़े 38 से कम ना होगा, पतलि कमर और उसके नीचे फैलते हुए चौरे, भरि नितमब । एक बर फिर मेरे दिल कि धकन बरह गयि । इस बर मैने हिम्मत कर के भभि से पूच हि लिया।

" भभि, मेरा आज एक्सम है और आप को तो कोइ चिनता हि नहि थि। बिना परहहे हि आप कल रात सोने चल दि"

" कैसि बातेन करता है रमु, तेरि चिनता नहि करुनगि तो किसकि करुनगि?"

" झूत, मेरि चिनता थि तो गयि कयोन?"

" तेरे भैया ने जो शोर मचा रखा था।"

" भभि, भैया ने कयोन शोर मचा रखा था" मैने बरे हि भोले सवर मेन पूचा। भभि शयद मेरि चलकि समझ गयि और तिरचि नज़र से देखते हुए बोलि,

" धत बदमश, सब समझता है और फिर भि पूच रहा है। मेरे खयल से तेरि अब शादि कर देनि चहिये। बोल है कोइ लदकि पसनद?"

" भभि सच कहुन मुझे तो आप हि बहुत अछि लगति हो।

" चल नलयक भग येहन से और जा कर अपना एक्सम दे।"

मैन एक्सम तो कया देता, सरा दिन भभि के हि बरे मेन सोचता रहा। पहलि बर भभि से ऐसि बतेन कि थि और भभि बिलकुल नरज़ नहि हुइ। इस्से मेरि हिम्मत और बधने लगि। मैन भभि का दिवना होता जा रहा था। भभि रोज़ रात को देर तक परहति थि । मुझे महसुस हुअ शयद भैया भभि को महीने मेन दो तीन बर हि चोदते थे। मैन अकसर सोचता, अगर भभि जैसि खूबसूरत औरत मुझे मिल जये तो दिन मेन चर दफ़े चोदुन।

दिवलि के लिये भभि को मयके जना था। भैया ने उनहेन मयके ले जने का कम मुझे सोनपा कयोनकि भैया को छुत्ति नहि मिल सकि। बहुत भीर थि। मैन भभि के पीचे रैलवय सततिओन पर रेसेरवतिओन कि लिने मेन खरा था। धक्का मुक्कि के करन अदमि अदमि से सता जा रहा था। मेरा लुनद बर बर भभि के मोते मोते नितमबोन से रगर रहा था।मेरे दिल कि धकन तेज़ होने लगि। हलकि मुझे कोइ धक्का भि नहि दे रहा था, फिर भि मैन भभि के पीचे चिपक के खरा था। मेरा लुनद फनफना कर उनदेरवेअर से बहर निकल कर भभि के चुतरोन के बीच मेन घुसने कि कोशिश कर रहा था। भभि ने हलके से अपने चुत्रोन को पीचे कि तरफ़ धक्का दिया जिससे मेरा लुनद और जोर से उनके चुतरोन से रगरने लगा। लगता है भभि को मेरे लुनद कि गरमहत महसुस हो गयि थि और उसका हाल पता था लेकिन उनहोनेन दूर होने कि कोशिश नहि कि। भीर के करन सिरफ़ भभि को हि रेसेरवतिओन मिला। त्रैन मेन हुम दोनो एक हि सेअत पर थे। रात को भभि के कहने पर मैने अपनि तनगेन भभि के तरफ़ और उनहोने अपनि तनगेन मेरि तरफ़ कर लिन और इस परकर हुम दोनो असनि से लैत गये। रात को मेरि अनख खुलि तो त्रैन के निघत लमप कि हलकि हलकि रोशनि मेन मैने देखा, भभि गहरि नीनद मेन सो रहि थि और उसकि सरि जनघोन तक सरक गयि थि । भभि कि गोरि गोरि ननगि तनगेन और मोति मनसल जनघेन देख कर मैन अपना सोनत्रोल खोने लगा। सरि का पल्लु भि एक तरफ़ गिरा हुअ था और बरि बरि चुचिअन बलौसे मेन से बहर गिरने को हो रहि थि। मैन मन हि मन मनने लगा कि सरि थोरि और उपर उथ जये तकि भभि कि चूत के दरशन कर सकुन। मैने हिम्मत करके बहुत हि धीरे से सरि को उपर सरकना शुरु किया। सरि अब भभि कि चूत से सिरफ़ 2 इनच हि नीचे थि पर कम रोशनि होने के करन मुझे यह नहि समझ आ रहा था कि 2इनच उपर जो कलिमा नज़र आ रहि थि वोह कले रनग कि कछि थि या भभि कि झतेन। मैने सरि को थोरा और उपर उथने कि जैसे हि कोशिसक कि, भभि ने करवत बदलि और सरि को नीचे खीनच लिया। मैने गहरी सनस लि और फिर से सोने कि कोशिश करने लगा।

मयके मेन भभि ने मेरि बहुत खतिरदरि कि। दस दिन के बद हुम वपस लोत आये। वपसि मेन मुझे भभि के साथ लैतने का मोका नहि लगा। भैया भभि को देख कर बहुत खुश हुए और मैन समझ गया कि आज रात भभि कि चुदै निशचित है। उस रात को मैन पहले कि तरह भभि के दरवज़े से कन लगा कर खरा हो गया।भैया कुछ ज़यदा हि जोश मेन थे । उनदेर से अवज़ेन साफ़ सुनै दे रहि थि।

" कनचन मेरि जान, तुमने तो हमेन बहुत सतया। देखो ना हमरा लुनद तुमहरि चूत के लिये कैसे तरप रहा है। अब तो इनका मिलन करवा दो।"

" है रम, आज तो येह कुछ ज़यदा हि बरा धिख रहा है। ओह हो! थहरिये भि, सरि तो उतरने दिजिये।"

"बरा कयोन नहि उतरि मेरि जान, पूरि तरह ननगि करके हि तो चोदने मेन मज़ा आता है। तुमहरे जैसि खूबसूरत औरत को चोदना हर अदमि कि किसमत मेन नहिन होता।"

"झूत! ऐसि बात है तो आप तो महीने मेन सिरफ़ दो तीन बर हि ……।।"

" दो तीन बर हि कया?"

" ओह हो, मेरे मुनह से गनदि बात बुलवना चहते हैन"

" बोलो ना मेरि जान, दो तीन बर कया।"

" अछा बबा, बोलति हुन; महीने मेन दो तीन बर हि तो चोदते हो। बुस!!"

" कनचन, तुमहरे मुनह से चुदै कि बात सुन कर मेरा लुनद अब और इनतज़र नहिन कर सकता। थोरा अपनि तनगेन और चौरि करो। मुझे तुमहरि चूत बहुत अछि लगति है, मेरि जान।"

" मुझे भि अपका बहुत……। आआह…।।मर गयि…।ऊओह…।आह…ऊफ़।।औइ मा, बहुत अछा लग रहा है…।थोरा धीरे…हन थीक है…।थोरा ज़ोर से…आह।।अह।।अह ।"

उनदेर से भभि के करहने कि अवज़ के सथ सथ फुच।।फुच।।फुच जैसि अवज़ भि आ रहि थि जो मैन समझ नहिन सका।बहर खरे हुए मैन अपने आप को सोनत्रोल नहिन कर सका और मेरा लुनद झर गया। मैन जलदि से वपस आ कर अपने बिसतर पर लैत गया। अब तो मैन रात दिन भभि को चोदने के सपने देखने लगा। मैने आज तक किसि लदकि को नहिन चोदा था लेकिन चुदै कि कला से भलि भनति परिचित था। मैने एनगलिश कि बहुत सि गनदि विदेओ फ़िलमस देख रखि थि और हिनदि तथा एनगलिश के कयि गनदे नोवेल भि परहे थे। मैन अकसर कलपना करने लगा कि भभि बिलकुल ननगि होकर कैसि लगति होगि। जितने लुमबे और घने बाल उनके सिर पर थे ज़रूर उतने हि घने बाल उनहि चूत पर भि होनगे। भैया भभि को कोन कोन सि मुदरावँ मेन चोदते होनगे। एकदुम ननगि भभि तनगेन फैलै हुए चुदवने कि मुदरा मेन बहुत हि सेक्सी लगति होगि। यह सुब सोच कर मेरि भभि के लिये कम वसना दिन परतिदिन बरहति जा रहि थि।

मैन भि लुमबा तगरा अदमि हुन। कद करिब 6 फ़ूत है। अपने सोल्लेगे का बोदी बुइलदिनग का चमपिओन हुन। रोज़ दो घनते कसरत और मालिश करता हुन। लेकिन सुबसे खस चीसे है मेरा लुनद। धीलि अवसथा मेन भि 8 इनच लुमबा और 3 इनच मोता किसि हथोरे के मफ़िक लतकता रेहता है। यदि मैन उनदेरवेअर ना पहनुन तो पनत के उपर से भि उसका अकर साफ़ दिखै देता है। खरा हो कर तो उसकि लुमबै करीब 10 इनच और मोतै 4इनच हो जति है। एक दोसतोर ने मुझे बतया था कि इतना लुमबा और मोता लुनद बहुत कम लोगोन का होता है। मैन अकसर वरनदह मेन अपनि लुनगि को घुतनोन तक उथा कर बैथ जता था और नेवसपपेर परहने का नतक करता था। जब भि कोइ लदकि घर के समने से निकलति, मैन अपनि तनगोन को थोरा सा इस परकर से चौरा करता कि उस लदकि को लुनगि के उनदेर से झनकता हुअ लुनद नज़र आ जये। मैने नेवसपपेर मेन छोता सा छेद कर रखा था। नेवसपपेर से अपना चेहरा छुपा कर उस छेद मेन से लदकि कि परतिकरिया देखने मेन बहुत मज़ा आता था। लदकिओन को लगता था कि मैन अपने लुनद कि नुमैश से बेखबर हुन। एक भि लदकि ऐसि ना थि जिसने मेरे लुनद को देख कर मुनह फेर लिया हो। धीरे धीरे मैन शदिशुदा औरतोन को भि लुनद दिखने लगा कयोनकि उनहेन हि लुमबे ,मोते लुनद का महतवा पता था।

एक दिन मैन अपने कमरे मेन परह रहा था कि भभि ने अवज़ लगै,

" रमु, ज़रा बहर जो कपरे सूख रहे हैन उनहेन उनदेर ले आओ। बरिश आने वलि है।"

" अछा भभि!" मैन कपरे लेने बहर चला गया। घने बदल छये हुए थे, भभि भि जलदि से मेरि हेलप करने आ गयि। दोरि पर से कपरे उतरते समय मैने देखा कि भभि कि बरा और कछि भि तनगि हुइ थि। मैने भभि कि बरा को उतर कर सिज़े परह लिया; सिज़े था 38स। उसके बाद मैने भभि कि कछि को हाथ मेन लिया। गुलबि रनग कि वो कछि करीब करीब परदरशि थि और इतनि छोति सि थि जैसे किसि दस साल कि बछि कि हो। भभि कि कछि का सपरश मुझे बहुत अननद दे रहा था और मैन मन हि मन सोचने लगा कि इतनि छोति सि कछि भभि के विशल नितमबोन और चूत को कैसे धकति होगि। शयद येह कछि भभि भैया को रिझने के लिये पहनति होगि। मैने उस छोति सि कछि को सूनघना शुरु कर दिया तकि भभि कि चूत कि कुछ खुशबू पा सकुन। भभि ने मुझे करते हुए देख लिया और बोलि

" कया सूनघ रहे हो रमु ? तुमहरे हाथ मेन कया है?"

मेरि चोरि पकरि गयि थि। बहना बनते हुए बोला

" देखो ना भभि ये छोति सि कछि पता नहिन किसकि है? येहन कैसे आ गयि।"

भभि मेरे हाथ मेन अपनि कछि देख कर झेनप गयि और छीनति हुइ बोलि

" लाओ इधेर दो।"

"किसकि है भभि ?" मैने अनजान बनते हुए पूचा।

" तुमसे कया मतलब, तुम अपना काम करो" भभि बनवति गुस्सा दिखते हुए बोलि।

"बता दो ना । अगर पदोस वलि बछि कि है तो लोता दुन।

" जी नहिन, लेकिन तुम सूनघ कया रहे थे?"

"अरे भभि मैन तो इसको पहनने वलि कि खुशबू सूनघ रहा था। बरि मदक खुशबू थि। बता दो ना किसकि है?’

भभि का चेहरा ये सुन कर शरम से लाल हो गया और वोह जलदि से उनदेर भाग गयि।

उस रात जब वोह मुझे परहने आई तो मैने देखा कि उनहोनेन एक सेक्सी सि निघतिए पहन रखि थि। निघतिए थोदि सि परदरशि थि। भभि जब कुछ उथने के लिये नीचे झुकि तो मुझे साफ़ नज़र आ रहा था कि भभि ने निघतिए के नीचे वोहि गुलबि रनग कि कछि पहन रखि थि। झुकने कि वजह से कछि कि रूप रेखा साफ़ नज़र आ रहि थि।मेरा अनदज़ा सहि था। कछि इतनि छोति थि कि भभि के भरि नितमबोन के बीच कि दरर मेन घुसि जा रहि थि। मेरे लुनद ने हरकत करनि शुरु कर दि। मुझसे ना रहा गया और मैन बोल हि परा,

"भभि अपने तो बतया नहिन लेकिन मुझे पता चल गया कि वो छोति सि कछि किसकि थि।"

" तुझे कैसे पता चल गया?" भभि ने शरमते हुए पूचा।

" कयोनकि वोह कछि आपने इस वकत निघतिए के नीचे पहन रखि है।"

" हुत बदमश! तु ये सुब देखता रहता है?"

" भभि एक बात पूछुन? इतनि छोति सि कछि मेन आप फ़ित कैसे होति हैन?" मैने हिम्मत जुता कर पूछ हि लिया।

" कयोन मैन कया तुझे मोति लगति हुन?"

" नहिन भभि, आप तो बहुत हि सुनदेर हैन। लेकिन आपका बदन इतना सुदोल और गथा हुअ है, आपके नितमब इतने भरि और फैले हुए हैन कि इस छोति सि कछि मेन समा हि नहिन सकते। आप इसे कयोन पहनति हैन? यह तो आपकि जयदाद को छुपा हि नहिन सकति और फिर यह तो परदरशि है , इसमे से तो आपका सुब कुछ दिखता होगा।"

" चुप नलयक, तु कुछ ज़यदा हि समझदर हो गया है। जब तेरि शादि होगि ना तो सुब अपने आप पता लग जयेगा। लगता है तेरि शादि जलदि हि करनि होगि, शैतन होता जा रहा है।"

" जिसकि इतनि सुनदेर भभि हो वोह किसि दूसरि लदकि के बारे मेन कयोन सोचने लगा?"

" ओह हो! अब तुझे कैसे समझावँ? देख रमु, जिन बातोन के बारे मेन तुझे अपनि बिवि से पता लग सकता है और जो चीसे तेरि बिवि तुझे दे सकति है वोह भभि तो नहिन दे सकति ना? इसि लिये कह रहि हुन शादि कर ले।"

" भभि ऐसि कया चीसे है जो सिरफ़ बिवि दे सकति है और आप नहिन दे सकति" मैने बहुत अनजान बनते हुए पूचा। अब तो मेरा लुनद फनफनने लगा था।

" मैन सुब समझति हुन चलाक कहिन का! तुझे सुब मलूम है फिर भि अनजान बनता है" भभि लजते हुए बोलि। " लगता है तुझे परहना लिखना नहिन है, मैन सोने जा रहि हुन।"

" लेकिन भैया ने तो आपको नहिन बुलया" मैने शररत भरे सवर मेन पूचा। भभि जबब मेन सिरफ़ मुसकुरते हुए अपने कमरे कि ओर चल दि। उनकि मसतनि चाल, मतकते हुए भरि नितमब और दोनो चुत्रोन के बीच मेन पिस रहि बेचरि कछि को देख कर मेरे लुनद का बुरा हाल था।

अगले दिन भिया के ओफ़्फ़िसे जने के बाद भभि और मैन वरनदह मेन बैथे चाय पी रहे थे। इतने मेन समने सरक पर एक गुय गुज़रि। उसके पीचे पीचे एक भरि भरकुम सानद हुनहर भरता हुअ आ रहा था। सानद का लुमबा मोता लुनद नीचे झूल रहा था। सानद के लुनद को देख कर भभि के माथे पर पसीना छलक अया। वोह उसके लुमबे तगरे लुनद से नज़रेन ना हता सकि। इतने मेन सानद ने जोर से हुनकर भरि और गुय पर चरह कर उसकि योनि मेन पूरा का पूरा लुनद उतर दिया। यह देख कर भभि के मुनह से सिसकरि निकले गयि। वोह सानद कि रास लीला और ना देख सकि और शरम के मारे उनदेर भाग गयि। मैन भि पीचे पीचे उनदेर गया। भभि कितचेन मेन थि। मैने बहुत हि भोले सवर मेन पूचा

" भभि वोह सानद कया कर रहा था?"

" तुझे नहिन मलूम?" भभि ने झूता गुस्सा दिखते हुए कहा।

" तुमहरि कसम भभि मुझे कैसे मलूम होगा ? बतैये ना।" हलनकि कि भभि को अछि तरह पता था कि मैन जान कर अनजान बुन रहा हुन लेकिन अब उसे भि मेरे साथ ऐसि बातेन करने मेन मज़ा आने लगा था। वोह मुझे समझते हुए बोलि

" देख रमु, सानद वोहि काम कर रहा था जो एक मरद अपनि बिवि के साथ शादि के बाद करता है।"

" आपका मतलब है कि मरद भि अपनि बिवि पर ऐसे हि चरहता है?"

" है रम! कैसे कैसे सवल पूचता है। हान और कया ऐसे हि चरहता है।"

" ओह! अब समझा, भैया आपको रात मेन कयोन बुलते हैन।"

" चुप नलयक, ऐसा तो सभि शादिशुदा लोग करते हैन।"

" जिनकि शादि नहिन हुइ वोह नहिन कर सकते?"

" कयोन नहिन कर सकते? वोह भि कर सकते हैन, लेकिन…।।" मैन तपक से बीच मेन हि बोल परा

" वाह भभि तुब तो मैन भि आप पर छरह……।।" भभि एकदुम मेरे मुनह पर हाथ रख कर बोलि " चुप, जा येहन से और मुझे काम करने दे।" और यह कह कर उनहोनेन मुझे कितचेन से बहर धकेल दिया।

इस घतना के दो दिन के बाद कि बात अहि। मैन छत पर परहने जा रहा था। भभि के कमरे के समने से गुज़रते समय मैने उनके कमरे मेन झनका। भभि अपने बिसतर पर लैती हुइ कोइ नोवेल परह रहि थि। उसकि निघतिए घुतनोन तक उपर चरहि हुइ थि। निहगतिए इस परकर से उथि हुइ थि कि भभि कि गोरि गोरि तनगेन, मोति मनसल जनघेन और जनघोन के बीच मेन सफ़ेद रनग कि कछि साफ़ नज़र आ रहि थि।मेरे कदम एकदुम रुक गये और इस खूबसूरत नज़रे को देखने के लिये मैन छुप कर खिरकि से झनकेने लगा।येह कछि भि उतनि हि छोति थि और बरि मुशकिल से भभि कि चूत को धक रहि थि। भभि कि घनि कलि झनतेन दोनो तरफ़ से कछि के बहर निकल रहि थि। वोह बेचरि छोति सि कछि भभि कि फूलि हुइ चूत के उभर से बुस किसि तरह चिपकि हुइ थि। चूत कि दोनो फनकोन के बीच मेन दबि हुइ कछि ऐसे लग रहि थि जैसे हनसते वकत भभि के गालोन मेन दिमपले पर जतेन हैन। अचनक भभि कि नज़र मुझ पर परह गयि । उनहोनेन झत से तनगेन नीचे करते हुए पूचा " कया देख रहा है रमु"

चोरि पकरि जाने के करन मैन सकपका गया और " कुछ नहिन भभि" कहता हुअ छत पर भाग गया। अब तो रात दिन भभि कि सफ़ेद कछि मेन चिपि हुइ चूत कि यद सतने लगि।

मेरे दिल मेन विचर अया, कयोन ना भभि को अपने विशल लुनद के दरशन करावँ। भभि रोज़ सवेरे मुझे दूध का गलस्स देने मेरे कमरे मेन आति थि। एक दिन सवेरे मैन अपनि लुनगि को घुतनोन तक उथा कर नेवसपपेर परहने का नतक करते हुए इस परकर बैथ गया कि सामने से आति हुइ भभि को मेरा लतकता हुअ लुनद नज़र आ जये। जैसे हि मुझे भभि के आने कि आहत सुनै दि,मैने नेवसपपेर अपने चेहरे के सामने कर लिया, तनगोन को थोरा और चौरा कर लिया तकि भभि को पूरे लुनद के आसनि से दरशन हो सकेन और नेवसपपेर के बीच के छेद से भभि कि परतिकरिया देखने के लिये रेअदी हो गया। जैसे हि भभि दूध का गलस्स लेकर मेरे कमरे मेन दखिल हुइ, उनकि नज़र लुनगि के नीचे से झनकते मेरे 8 इनच लुमबे मोते हथोरे के मफ़िक लतकते हुए लुनद पे पर गयि। वोह सकपका कर रुक गयि, अनखेन अशचरया से बरि हो गयि और उनहोनेन अपना नीचला होनथ दनतोन से दबा दिया। एक मिनुते बाद उनहोनेन होश समभला और जलदि से गलस्स रख कर भग गयि। करीब 5 मिनुते के बाद फिर भभि के कदमोन कि आहत सुनै दि। मैने झत से पहले वला पोसे धरन कर लिया और सोचने लगा, भभि अब कया करने आ रहि है। नेवसपपेर के छेद मेन से मैने देखा भभि हाथ मेन पोचे का कपरा ले कर उनदेर आयि और मुझसे करीब 5 फ़ूत दूर ज़मीन पर बैथ कर कुछ साफ़ करने का नतक करने लगि। वोह नीचे बैथ कर लुनगि के नीचे लतकता हुअ लुनद थीक से देखना चहति थि। मैने भि अपनि तनगोन को थोरा और चौरा कर दिया जिस्से भभि को मेरे विशल लुनद के साथ मेरि बल्लस के भि दरशन अछि परकर से हो जयेन। भभि कि अनखेन एकतक मेरे लुनद पर लगि हुइ थि, उनहोनेन अपने होनथ दनतोन से इतनि ज़ोर से कात लिये कि उनमे थोरा सा खून निकल आया। माथे पर पसीने कि बुनदेन उभर आयि। भभि कि यह हलत देख कर मेरे लुनद ने फिर से हरकत शुरु कर दि। मैने बिना नेवसपपेर चेहरे से हतय भभि से पूछा

" कया बात है भभि कया कर रहि हो?"

भभि हरबरा कर बोलि " कुछ नहिन, थोरा दूध गिर गया था उसे साफ़ कर रहि हुन।" येह कह कर वोह जलदि से उथ कर चलि गयि। मैन मन हि मन मुसकया। अब तो जैसे मुझे भभि कि चूत के सपने आते हैन वैसे हि भभि को भि मेरे विशल लुनद के सपने ऐनगे। लेकिन अब भभि एक कदम अगे थि। उसने तो मेरे लुनद के दरशन कर लिये थे पर मैने अभि तक उनकि चूत को नहिन देखा था।

मुझे मलूम था कि भभि रोज़ हमरे जाने के बाद घर का सरा काम निपता कर नहने जाति थि। मैने भभि कि चूत देखने का पलन बनया। एक दिन मैन सोल्लेगे जाते समय अपने कमरे कि खुलि छोर गया। उस दिन सोल्लेगे से मैन जलदि वपस आ गया। घर का दरवज़ा उनदेर से बुनद था। मैन चुपके से अपनि खिरकि के रसते अपने कमरे मेन दखिल हो गया। भभि कितचेन मेन काम कर रहि थि। काफ़ि देर इनतज़र करने के बाद आखिर मेरि तपसया रनग लयि। भभि अपने कमरे मेन आइ। वोह मसति मेन कुछ गुनगुना रहि थि। देखते हि देखते उसने अपनि निघतिए उतर दि। अब वोह सिरफ़ असमनि रनग कि बरा और कछि मेन थि। मेरा लुनद हुनकर भरने लगा। कया बला कि सुनदेर थि। गोरा बदन, पतलि कमर,उसके नीचे फैलते हुए भरि नितमब और मोति जनघेन किसि नमरद का भि लुनद खरा कर देन। भभि कि बरि बरि चुचिअन तो बरा मेन समा नहिन पा रहि थि। ओर फिर वहि छोति सि कछि, जिसने मेरि रतोन कि नीनद उरा रखि थि। भभि के भरि चुतर उनकि कछि से बहर गिर रहे थे। दोनो चुत्रोन का एक चौथै से भि कम भग कछि मेन था। बेचरि कछि भभि के चुत्रोन के बीच कि दरर मेन घुसने कि कोशिश कर रहि थि। उनकि जनघोन के बीच मेन कछि से धकि फूलि हुइ चूत का उभर तो मेरे दिल ओ दिमग को पगल बना रहा था। मैन सानस थामे इनतज़र कर रहा था कि कब भभि कछि उतरे और मैन उनकि चूत के दरशन करुन। भभि शीशे के समने खरि हो कर अपने को निहर रहि थि। उनकि पीथ मेरि तरफ़ थि। अचनक भभि ने अपनि बरा और फिर कछि उतर कर वहिन ज़मीन पर फेनक दि। अब तो उनके ननगे चौरे चुतर देख कर मेरा लुनद बिलकुल झरने वला हो गया।

मेरे मन मेन विचर आया कि भैया ज़रूर भभि कि चूत पीचे से भि लेते होनगे ओर कया कभि भैया ने भभि कि गानद मरि होगि। मुझे ऐसि लजबब औरत कि गानद मिल जाये तो मैन सवरग जने से भि इनकर कर दुन। लेकिन मेरि आज कि योजना पर तुब पनि फिर गया जब भभि बिना मेरि तरफ़ घुमे बथरूम मेन नहने चलि गयि। उनकि बरा और कछि वहिन ज़मीन पर परि थि। मैन जलदि से भभि के कमरे मेन गया और उनकि कछि उथा लया। मैने उनकि कछि को सूनघा। भभि कि चूत कि महक इतनि मदक थि कि मेरा लुनद और ना सहन कर सका और झर गया। मैने उस कछि को अपने पास हि रख लिया और भभि के बथरूम से बहर निकलने का इनतज़र करने लगा। सोचा जब भभि नहा कर ननगि बहर निकलेगि तो उनकि चूत के दरशन हो हि जैनगे। लेकिन किसमत ने फिर साथ नहिन दिया। भभि जब नहा के बहर निकलि तो उनहोने काले रनग कि कछि और बरा पहन रखि थि। कमरे मेन अपनि कछि गयब पा कर सोच मेन पर गयि। अचनक उनहोनेन जलदि से निघतिए पहन ली और मेरे कमरे कि तरफ़ आइ। शयद उनहेन शक हो गया कि यह काम मेरे इलवा और कोइ नहिन कर सकता। मैन झत से अपने बिसतेर पर ऐसे लैत गया जैसे नीनद मेन हुन। भभि मुझे कमरे मेन देखकर सकपका गयि। मुझे हिलते हुए बोलि

" रमु उथ। तु उनदेर कैसे आया?"

मैने आनखेन मलते हुए उथने का नतक करते हुए कहा " कया करुन भभि आज सोल्लेगे जलदि बुनद हो गया। घर का दरवज़ा बुनद था बहुत खतखतने पर जब आपने नहिन खोला तो मैन अपनि खिरकि के रासते उनदेर आ गया।"

" तु कितनि देर से उनदेर है?"

" येहि कोइ एक घनते से।"

अब तो भभि को शक हो गया कि शयद मैने उनहेन ननगि देख लिया था। और फिर उनकि कछि भि तो गयब थि। भभि ने शरमते हुए पूचा " कहिन तुने मेरे कमरे से कोइ चीसे तो नहिन उथै?’

" अरे हन भभि! जब मैन आया तो मैने देखा कि कुछ कपरे ज़मीन पर परे हैन। मैने उनहेन उथा लिया।" भभि का चेहरा सुरख हो गया। हिचकिचते हुए बोलि

" वपस कर मेरे कपदे।"

मैन तकिये के नीचे से भभि कि कछि निकलते हुए बोला " भभि ये तो अब मैन वपस नहिन दूनगा।"

"कयोन अब तु औरतोन कि कछि पहनना चहता है?"

" नहिन भभि" मैन कछि को सूनघता हुअ बोला

" इसकि मदक खुशबू ने तो मुझे दिवना बना दिया है।"

" अरे पगला है? येह तो मैने कल से पहनि हुइ थि। धोने तो दे।"

" नहिन भभि धोने से तो इसमे से आपकि महक निकल जयेगि। मैन इसे ऐसे हि रखना चहता हुन।"

" धत पगल! अछा तु कबसे घर मेन है?" भभि शयद जनना चहति थि कि कहिन मैने उसे ननगि तो नहिन देख लिया। मैने कहा

" भभि मैन जनता हुन कि आप कया जनना चहति हैन। मेरि गलति कया है, जब मैन घर अया तो आप बिलकुल ननगि शीशे के सामने खरि थि। लेकिन आपको सामने से नहिन देख सका। सच कहुन भभि आप बिलकुल ननगि हो कर बहुत हि सुनदेर लग रहि थि। पतलि कमर, भरि नितमब और गदरयि हुइ जनघेन देख कर तो बरे से बरे बरहमचरि कि नियत भि खराब हो जये।"

भभि शरम से लाल हो उथि।

" है रम तुझे शरम नहिन आति। कहिन तेरि भि नियत तो नहिन खरब हो गयि है?"

" आपको ननगि देख कर किसकि नियत खराब नहिन होगि?"

" हे भगवन, आज तेरे भैया से तेरि शादि कि बात करनि हि परेगि" इस्से पहले मैन कुस्सह और कहता वोह अपने कमरे मेन भग गयि।

CONTD…….

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