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मोहिनी का कमर दर्द-1 - Mohini Ka Kamar Dard 1

Posted on Wednesday, 31 October 2012 | No Comments


मोहिनी का कमर दर्द-1
प्रेषक : प्रथम

हेलो दोस्तो,

यह मेरी पहली कहानी है अन्तर्वासना पर जिसे मैं आप सबको बताना चाहता था मगर समय ही नहीं मिल पाता था।

यह कहानी मेरी और मेरी प्यारी सासू माँ की है जिसका नाम मोहिनी है। वो उस वक़्त करीब 45 की रही होगी और उसका फिगर करीब 34-32-36 होगा। मेरी शादी से पहले से ही जबसे मैंने उसे देखा था उसकी भारी हुई गाण्ड हमेशा से ही मुझे आकर्षित करती थी। करीब दो साल तक मैं उसके नाम से मुठ मारता रहा था और यहाँ तक कि जब भी अपनी बीवी को चुदाई करता था तब भी मेरे दिमाग़ में वही रहती थी और में यही सोचा करता था कि मैं मोहिनी को ही ठोक रहा हूँ।

तो बात उस समय की है जब हम लोग सास ससुर के साथ मेरे साले के घर पुणे घूमने गये थे। तभी अचानक से एक खबर आई कि मेरे ससुर के कोई रिश्तेदार गुजर गए हैं और हम सबको मुंबई जाना था।

हम सबने तैयारी कर ली कि तभी मोहिनी को अचानक से कमर में दर्द होने लग गया। अब जाना भी ज़रूरी था और उसे इस हालत में लेकर भी नहीं जा सकते थे तो मैंने कह दिया कि आप लोगों के रिश्तेदार हैं, आप लोग जाओ, मैं और मम्मी जी यहीं रह जाएँगे और जब इनकी तबीयत ठीक होगी तब हम आ जाएँगे।

अब और कोई चारा भी नहीं था उन लोगों के पास और मैं मन ही मन सोच रहा था कि शायद आज मेरे भाग जाग जाएँ।

फिर मैं उन लोगों को पुणे से मुंबई की बस में बिठा कर आया। मोहिनी घर में ही थी।जैसे ही घर गया मैंने घण्टी बजाई तो मोहिनी ने दरवाजा खोला। मैंने देखा कि उसने अपने कपड़े बदल लिए हैं, अब उसने एक मैरून रंग की नाइटी पहन ली है जिसमें वो बहुत सेक्सी लग रही थी।

मैंने पूछा- कैसी हैं आप?

तो वो बोली- हाँ, थोड़ी भीड़ कम हुई है घर की तो अच्छा लग रहा है !

असल में वो जाना ही नहीं चाहती थी क्योंकि जिनकी मृत्यु हुई है उनसे मोहिनी का पंगा चलता था और इसीलिए मेरे ससुर जी ने भी शायद उसे रहने दिया।

खैर मैंने कहा- अब तो 3-4 दिन की कम से कम फ़ुर्सत ही है। आप और मैं आराम करेंगे घर में !

तो वो बोली- हाँ बिल्कुल दामाद जी ! आपको आराम मिले, यही तो मैं चाहती हूँ !

और इतना बोलकर उसने एक कुटिल मुस्कान दी।

मैंने उसको पूछा- क्या सही में आपकी कमर में दर्द है? तो मैं मालिश कर देता हूँ, थोड़ा आराम मिल जाएगा !

तो वो बोली- इतना ज़्यादा दर्द तो नहीं है, मगर हाँ, अगर आप मालिश कर दोगे तो शायद आराम ही मिल जाए मेरे इस शरीर को।

मैंने कहा- चलो तो फिर आज मैं आपको बॉडी मसाज देता हूँ।

और इतना कहकर मैंने उसे इशारा किया की चलो बेडरूम में चलते हैं।

और हम दोनों बेडरूम में आ गये।

उसने कहा- बेटा, आप कपड़े बदल लो, वरना तेल आपके कपड़ों में लग जाएगा और कपड़े खराब हो जाएँगे।

तो मैंने कहा- यहाँ इतनी गर्मी है, तो बदलना क्या, जो पहना हूँ वही उतार दूँगा।

वो बोली- ठीक है, जैसी आपकी मर्ज़ी।

फिर मैंने तेल की शीशी उठाई और टीवी चला दिया।

मैंने कहा- आप बिस्तर पर बैठे रहो, मैं मालिश शुरु करता हूँ !

वो बोली- आपकी जैसी मर्ज़ी, वैसी मालिश कर दो दामाद जी ! मैं तो कब से बॉडी मसाज का इन्तजार कर रही हूँ, मगर आपके ससुर तो कभी करते ही नहीं।

फिर वो बेड से टिक कर बैठ गई और मैं उसके पास बैठ गया, मैंने कहा- मैं पहले आपके सिर से शुरु करता हूँ !

वो बोली- ठीक है।

मैंने उसके बाल खोल दिए और वो खुले बालों में और मैरून नाइटी में कयामत लग रही थी। फिर मैं उसके पीछे बैठ गया और अपने दोनों पैर उसके दोनों तरफ डाल कर उसे बीच में अपने से टिका लिया और अपने हाथों में तेल लेकर उसके सिर में मालिश शुरु की हल्के हल्के हाथों से !

इतने में ही मेरी पैंट में हलचल होने लगी थी जिसे उसने पहचान लिया, वो बोली- अरे दामाद जी, ऐसा लग रहा है कि आप भी काफ़ी दिनों से मेरी मसाज करने की इंतज़ार में थे?

मैं कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुरा दिया।

फिर उसने मुझे कहा- ऐसे तो आपकी पैंट खराब हो जाएगी, आप आराम से रहो, इतने फॉर्मल मत बनिए, जैसे आप अपने घर में रहते हो, वैसे भी रह सकते हो, मैं आपको कुछ नहीं कहूँगी और ना ही कुछ करूँगी।

तो मैंने कहा- अब ठीक है, आप इतना बोल रही हैं तो मैं अपनी पैंट उतार देता हूँ।

कह कर मैंने अपने पैर बाहर निकले तो वो पीछे घूम गई बोली- रहने दो, आपसे शायद नहीं होगा, मैं आपकी मदद कर देती हूँ पैंट उतारने में !

और इतना बोल कर उसका हाथ सीधे मेरी जीन्स के हुक पर गया और मैं पीछे बेड पर टेक लगा कर बैठ गया अपने दोनों पैर फैला कर और उसने मेरी जीन्स के बटन खोल कर ज़िप खोल दी।

मैं आराम से बैठा हुआ था तो वो बोली- अरे, आप तो आराम से बैठ गये, अब उतरुँगी भी मैं ही क्या आपकी जीन्स?

तो मैंने कहा- प्लीज़ उतार दीजिए ना।

तो वो मुझे देख कर मुस्कुरई और बोली- ठीक है, अब अपनी तशरीफ़ उठाएँ तो मैं निकालूँ उसे।

तो मैंने अपनी गाण्ड उठाई और उसने दोनों हाथ मेरी गाण्ड के नीचे डाल कर मेरी जीन्स निकाल दी, फिर वो बोली- लाइए अब एक बार उठे हैं तो टीशर्ट भी निकाल ही देती हूँ, मुझे पता है कि आप घर में बॉक्सर और टॉपलेस ही रहते हो।

कहकर उसने मेरी टीशर्ट भी निकाल दी। अब मैं उसके सामने सिर्फ़ बॉक्सर में ही था। तभी उसने मेरे बॉक्सर में बने तम्बू को देखा तो बोली- अरे लगता है कि कोई तो आज किसी और ही मसाज के मूड में है।

मैंने उसे देखा और कहा- हाँ, मैं फ्री में कुछ नहीं करता और यह मसाज भी आपको फ्री में नहीं दूँगा।

तो वो बोली- बदले में जो चाहिए, सब ले लो, जो मेरे पास है सब आपका ही है।

कहकर वो मेरे ऊपर गिर गई और मैं उसके नीचे दबा हुआ था और उसने अपनी जुल्फे मेरे चेहरे पे फैला दी और हम दोनों उसकी ज़ुल्फो के साए में एक दूसरे को चूम रहे थे।

हम दोनों ने शुरु ही होंठों के चुम्बन से किया। हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से मिले हुए थे और एक दूसरे की ज़ुबान को चूस रहे थे।

मैंने अपने हाथों को धीरे धीरे उसकी पीठ पर फेरना शुरू कर दिया और अपनी दोनों टाँगे उसकी कमर से निकाल कर उसके कमर के दोनों ओर लपेट ली।

वो बोली- मसाज-वसाज तो गई माँ चुदाने ! आज तो चुदाई की रात है, मेरी दूसरी सुहागरात है आज तो।

कह कर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके सिर को कस कर पकड़ लिया और उसके मुँह में अपने होंठ और जुबान घुसा दी। वो भी ऊपर से अपनी चूत को मेरे लण्ड पर दबा रही थी। अब मैंने अपने दोनों हाथ उसकी गांड पर ले आया और उन्हें दबाने लगा। उसकी सिल्क की नाइटी मेरे नंगे बदन पर बड़ा अच्छा अनुभव दे रही थी।

तभी वो उठ कर बैठ गई और बोली- पहले जो काम कर रहे थे वो तो करो दामाद जी !

उसका इशारा शायद मसाज की तरफ था तो मैंने फिर से उसके दोनों ओर टाँगे डाल कर उसके सिर में मसाज शुरू दी मगर अब मेरा दिमाग और मेरा लण्ड दोनों ही इस लायक नहीं थे कि मैं उसकी हेड-मसाज करूँ तो मैंने फिर उसके बालों को एक तरफ़ किया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा और अपने हाथ उसके बालों से निकाल कर उसके चेहरे और गर्दन पर फिराने लगा।

अब उसकी आँखें बंद हो गई थी और वो भी मज़ा ले रही थी। फिर मैंने महसूस किया कि उसका एक हाथ मेरी जाँघों पर फिर रहा है और दूसरे हाथ से वो अपनी ही चूत दबा रही थी।

फिर उसने अपनी दोनों टाँगें फैला दी जिससे उसकी नाइटी उसके घुटनों तक सरक गई और उसकी गोरी-गोरी टाँगे मेरे आँखों के सामने आते ही मैंने अपना आपा खो दिया और अपने दोनों हाथ उसके स्तनों पर ले आया और नाइटी के ऊपर से ही उनकी मालिश करने लग गया। मगर उसने अंदर ब्रा पहनी थी तो मुझे कुछ मज़ा नहीं आ रहा था। फिर मैंने उसे आगे बिठा कर उसकी दोनों बाँहे ऊपर उठा कर उसकी बगलों में चूसने लगा।

आअहह ! उसके पसीने की वो खुश्बू जिसने हमेशा से मुझे उसका दीवाना बना कर रखा था, आज मैं वही सूंघ रहा था और मैं उसकी बगलें चाटने लगा। उसने बगलें एकदम साफ कर कर रखी थी।

वो बोली- मुझे पता है कि आपको बगलों में सूंघना बहुत पसंद है।

फिर मैं उसकी बगलों में सूँघते हुए उसके स्तनों को दबाता रहा और फिर मैंने उसकी नाइटी को और ऊपर उसकी जाँघों तक सरका दिया और अपना एक हाथ उसकी जाँघों पर फेरने लगा तो वो पागल ही हो उठी और तड़प कर उसने एक आआआहह भरी, ज़ोर से उसने मेरे लण्ड को बॉक्सर के ऊपर से ही पकड़ लिया और उसे मसलने लगी।

फिर वो एकदम से पलट कर बोली- बस अब और नहीं सहा जाता मुझसे ! बहुत दिन दूरी सह ली, अब और नहीं !

और पलट कर उसने बॉक्सर के ऊपर से ही मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और अपने दोनों हाथ मेरी जाँघों पर फेरने लग गई।

अब मैं लेट गया था और लेटे-लेटे उसे देख रहा था। फिर उसने अपने हाथों को मेरे बॉक्सर के अंदर सरका कर लण्ड को पकड़ लिया और उसने एक झटके से बॉक्सर को खींच कर उतार दिया। मेरा लण्ड उसे सलामी देता हुआ स्प्रिंग के तरह बाहर आ गया और वो तो अपना आपा ही खो चुकी थी, उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था, उसने मेरे लण्ड के सुपारे को पीछे खींच कर उसकी गुलाबी चमड़ी को खींच कर निकाला और अपनी जीभ धीरे धीरे उस पर फिराने लग गई।

मुझे ऐसा लगा जैसे मैं सातवे आसमान पर हूँ।

उसकी नाइटी गले में से उसके स्तन ब्रा में क़ैद दिख रहे थे। मैं नाइटी के ऊपर से ही उसके स्तन दबाने लग गया और एक हाथ से उसकी गाण्ड सहलाने लग गया। फिर देखते देखते ही मैंने उसकी नाइटी को उसकी गाण्ड के ऊपर से सरका लिया और फिर वो थोड़ी सी हिली तो मैंने उसकी नाइटी को उसके सिर से निकाल दिया और उसकी नाइटी को ही सूंघने लगा।

आआआआहह ! दोस्तो क्या खुश्बू थी उस नाइटी में।

अब वो मेरे सामने सफ़ेद ब्रा और लाल सफ़ेद धारीदार पैंटी में थी और झुकी हुई मेरे लण्ड को चूस रही थी।

मेरे लण्ड में से भी अब लेस बाहर आने लगा था जिसे वो बड़े चाव से चूस और चाट रही थी।

वो बोली- मैंने आज तक जिंदगी में कभी लण्ड मुँह में नहीं लिया और मैं यह भी जानती हूँ कि आपको लण्ड चुसवाना बहुत पसंद है। जिस दिन मेरी बेटी ने...

कहानी जारी रहेगी।

mausam.itsme@gmail.com


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